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डीयू के कॉलेजों में ईडब्ल्यूएस सीटों का अभी तक नहीं हुआ आवंटन, शिक्षा मंत्री से हस्तक्षेप की मांग

दिल्ली विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों में पिछले दो साल से जारी सहायक प्रोफेसर के पदों पर स्थायी नियुक्ति की प्रक्रिया के तहत अब तक शिक्षकों की 80 फीसदी सीटें यानी लगभग 4600 पदों पर नियुक्ति की जा चुकी है। वहीं दूसरी तरफ शिक्षा मंत्रालय की ओर से दिल्ली विश्वविद्यालय के विभागों/कॉलेजों को अभी तक ईडब्ल्यूएस सीटें आबंटित नहीं की गयी हैं। डीयू में ईडब्ल्यूएस कोटे की 3000 सीटें हैं। उक्त बातें संज्ञान में लाते हुए फोरम ऑफ एकेडेमिक्स फॉर सोशल जस्टिस शिक्षक संगठन ने पत्र लिखकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से मांग की है कि दिल्ली विश्वविद्यालय को शैक्षणिक सत्र 2024 -25 में ईडब्ल्यूएस सीटों का आवंटन किया जाए ताकि कॉलेजों को ईडब्ल्यूएस सीटों का लाभ मिल सके। 

फोरम के चेयरमैन डॉ. हंसराज सुमन ने बताया कि दिल्ली विश्वविद्यालय के सहायक कुलसचिव ( कॉलेजिज ) ने नौ महीने पूर्व विश्वविद्यालय से सम्बद्ध सभी कॉलेजों के प्राचार्यो तथा संस्थान के निदेशकों को सर्कुलर जारी करते हुए ईडब्ल्यूएस की 10 फीसदी अतिरिक्त पदों की आवश्यकता के विषय में जानकारी मांगी थी। कॉलेजों से आंकड़े देने को कहा गया था कि 10 फीसदी सीटों के बढ़ने पर उनके कॉलेज में कितने शिक्षक पदों  की आवश्यकता है। कॉलेजों के प्राचार्यों ने शैक्षिक व गैर शैक्षिक पदों के आंकड़े विश्वविद्यालय को भेज दिए। भेजे गए शैक्षिक पदों के आंकड़ों को लेकर पिछले दिनों डूटा के अध्यक्ष प्रोफेसर अजय भागी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से मिले थे । शिक्षा मंत्री ने उन्हें आश्वासन दिया था कि दिल्ली विश्वविद्यालय जैसे ही अपने कॉलेजों में शिक्षकों की 75 फीसदी पदों पर स्थायी भर्ती प्रक्रिया पूरी कर लेगा, शिक्षा मंत्रालय उन्हें ईडब्ल्यूएस के कारण बढ़ी सीटें दे देगा। उन्होंने कहा कि अब जब डीयू कॉलेजों में 80 फीसदी सहायक प्रोफेसरों की स्थायी नियुक्ति हो चुकी है, शिक्षा मंत्रालय को अपना आश्वासन पूरा करना चाहिए । 

डॉ. सुमन ने बताया है कि दिल्ली विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों में शैक्षिक पदों पर ईडब्ल्यूएस अभ्यर्थियों को 10 फीसदी अतिरिक्त सीटों का ब्यौरा 46 कॉलेजों के प्राचार्यों ने दिया है। कॉलेजों के प्राचार्यो ने छात्रों की बढ़ी संख्या के आधार पर  25 फीसदी अतिरिक्त शिक्षकों की मांग की है। बाकी लगभग 35 कॉलेजों ने अभी आंकड़े  जारी नहीं किए। कॉलेजों में ईडब्ल्यूएस के कारण शिक्षकों की सीटें बढ़ी हैं। डॉ. सुमन का कहना है कि कॉलेजों व संस्थानों में ईडब्ल्यूएस की अतिरिक्त सीटों के बढ़ने से सामान्य वर्गों के उन एडहॉक टीचर्स को भी राहत मिलेगी जिनकी सीटें 200 पॉइंट पोस्ट बेस रोस्टर के अंतर्गत ईडब्ल्यूएस में चली गई थीं तथा स्थायी नियुक्ति के समय कुछ कॉलेजों से डिस्प्लेसमेन्ट भी हुए हैं । 

डॉ. हंसराज सुमन ने  बताया है कि कॉलेजों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के उम्मीदवारों के लिए ईडब्ल्यूएस सीटों के मिलने पर समाज के सभी कमजोर वर्गों के शिक्षकों के साथ सामाजिक न्याय होगा। उनका यह भी कहना है कि दिल्ली सरकार के कॉलेजों में शिक्षकों की भर्ती कम हुई है और पद ज्यादा हैं। 

Asmita Sarkar

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