
अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) ने शैक्षणिक सिद्धांत और व्यावहारिक अनुप्रयोग के बीच की खाई को पाटने की दिशा में अहम कदम उठाते हुए उद्योग-अकादमिक गतिशीलता को बढ़ाने के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं। दिशा -निर्देशों में प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस (पीओपी), एसोसिएट और असिस्टेंट पीओपी की नियुक्ति, भारती (लचीले और प्रतिभाशाली भारतीय महिलाओं के समावेश के माध्यम से उच्च शिक्षा को बढ़ावा देना) पहल के तहत महिला पीओपी की गतिशीलता बढ़ाना और ज्ञान के आदान-प्रदान को सुविधाजनक बनाने के उपाय किए गए हैं।
एआईसीटीई के अध्यक्ष प्रो. टीजी सीतारामन ने दिशानिर्देश जारी करते हुए कहा कि “यह व्यापक रूपरेखा उच्च शिक्षा में उत्कृष्टता के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है और शिक्षा और उद्योग के बीच मजबूत, स्थायी संबंधों को बढ़ावा देती है। प्रैक्टिस प्रोफेसर की भूमिका सैद्धांतिक ज्ञान और व्यावहारिक अनुप्रयोग के बीच की खाई को पाटती है और वास्तविक दुनिया की अंतर्दृष्टि के साथ शैक्षणिक वातावरण को समृद्ध करती है। इसके अलावा महिला प्रैक्टिस प्रोफेसरों की नियुक्ति को प्रोत्साहित करना उच्च शिक्षा और पेशेवर क्षेत्र में लैंगिक समानता की दिशा में एक अहम कदम है।”
प्रो. सीताराम ने घोषणा की कि एआईसीटीई जल्द ही प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस के वित्तपोषित की पहल शुरू करेगी। भारती पहल के तहत 100 महिला पीओपी को पारिश्रमिक देने की जिम्मेदारी संभालेंगी। इसके अलावा यह योजना प्रतिष्ठित पेशेवरों व उद्योग विशेषज्ञों को विशेष रूप से उन लोगों को, जिनका करियर ब्रेक हो गया है, सफलतापूर्वक वापसी करने में सक्षम बनाएगी।
एआईसीटीई के उपाध्यक्ष डॉ. अभय जेरे ने कहा कि प्रैक्टिस प्रोफेसर की भूमिका के लिए 15 वर्ष का अनुभव प्राप्त करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है, ऐसे में हमने प्रैक्टिस एसोसिएट प्रोफेसर और प्रैक्टिस असिस्टेंट प्रोफेसरों की नियुक्ति के लिए दिशानिर्देश पेश किए हैं। ये अतिरिक्त भूमिकाएं सुनिश्चित करेंगी कि अनुभवी पेशेवरों की एक विस्तृत शृंखला हमारे शैक्षणिक वातावरण में योगदान दे सके।




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