
मध्य प्रदेश के सभी 55 जिलों में प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेन्स शुरू किए जाएंगे और इन्हें भारतीय ज्ञान परंपरा के केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। राज्य सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत हर जिले में 1-1 एक्सीलेन्स कॉलेज स्थापित करने की स्वीकृति दे दी है। इसके लिए चयनित कॉलेजों में अतिरिक्त पद स्वीकृत कर आवश्यक बजट दिया जाएगा। ये कॉलेज 1 जुलाई से शुरू होंगे।
उक्त जानकारी देते हुए राज्य के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बताया कि मप्र में शुरू हो रहे एक्सीलेंस कॉलेज अन्य राज्यों के लिए मॉडल शिक्षण केन्द्र बनेंगे। इसमें उच्च शिक्षा विभाग के साथ अन्य विभागों, जिला प्रशासन, विद्यार्थी व अभिभावकों की भूमिका अहम होगी।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को अफसरों की बैठक ली जिसमें शिक्षा से सम्बंधित कई मसलों पर विचार-विमर्श किया गया, फैसले लिए गए और आवश्यक निर्देश भी दिए गए। मुख्यमंत्री ने कॉलेज-यूनिवर्सिटी में रोजगारपरक कोर्स शुरू करने व स्टूडेंट्स को हरसंभव जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया। कहा, कॉलेज-विवि में विमानन, एआई व कृषि आधारित पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे। साथ ही विद्यार्थियों को एक रुपए में परिवहन सेवा उपलब्ध होगी। इसके लिए जरूरी बजट का प्रावधान किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने प्रदेश में ड्रोन नीति बनाए जाने व उच्च शिक्षा, उद्योग, कृषि और अन्य विभागों में इनकी उपयोगिता पर जोर देते हुए इसके प्रशिक्षण के लिए रणनीति बनाने की बात कही। सीएम ने विमानन एवं आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस में युवाओं को दक्ष कर रोजगार के अवसर मुहैया कराने के निर्देश दिए।
सीएम ने बताया कि देश का पहला हेलीकॉप्टर पायलट ट्रेनिंग स्कूल खजुराहो में शुरू किया गया है। राज्य सरकार हर जिले की हवाई पट्टियों में इस तरह के पायलट ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट खोलेगी। साथ ही डिग्री और डिप्लोमा कोर्स शुरू की जाएगी। इससे रोजगारपरक शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा। निवेश भी बढ़ेगा।




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