
राजस्थान की भजनलाल सरकार ने राजीव गांधी स्कॉलरशिप फॉर एकेडमिक एक्सीलेंस योजना का नाम बदलने के बाद विवेकानंद स्कॉलरशिप फॉर एकेडमिक एक्सीलेंस योजना के नियमों में भी संशोधन किया है। इसके बाद विवेकानंद स्कॉलरशिप फॉर एकेडमिक एक्सीलेंस योजना के तहत 300 स्टूडेंट्स को विदेश में और 200 स्टूडेंट्स को देश (भारत) के ही नामी संस्थानों में पढऩे भेजा जाएगा।
उपमुख्यमंत्री और उच्च शिक्षा मंत्री डॉ प्रेम बैरवा ने कोटा ओपन यूनिवर्सिटी में बताया- विवेकानंद स्कॉलरशिप फॉर एकेडमिक एक्सीलेंस योजना का रिव्यू करने के बाद सरकार ने इसमें आंशिक संशोधन करने का फैसला किया है। इसके तहत अब 300 स्टूडेंट्स को ही विदेश में पढऩे भेजा जाएगा जबकि 200 स्टूडेंट्स को देश के ही नामी संस्थान में पढ़ाया जाएगा।
बैरवा ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से विवेकानन्द छात्रवृत्ति योजना के बंद होने की अटकलें चल रही थीं, लेकिन सरकार इस योजना को बंद नहीं करने जा रही है. बल्कि हम इस छात्रवृत्ति योजना को बेहतर बनाने पर काम कर रहे हैं, ताकि गांवों और झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले जरूरतमंद छात्रों को भी मुफ्त में बेहतर से बेहतर शिक्षा मिल सके।
बता दें कि पहले यह योजना सिर्फ 200 विद्यार्थियों के लिए थी, जिसे बढाकर अब 500 कर दिया गया है। आठ लाख रुपये से कम आय वर्ग के परिवार के बच्चों को 50 लाख रुपये तक की स्कॉलरशिप दी जाएगी। विदेश के रहने के लिए एक लाख रुपये प्रतिमाह तक का खर्च दिया जाएगा। आठ से पच्चीस लाख रुपये की आय वाले परिवार के बच्चों को 42 लाख रुपये तक की स्कॉलरशिप दी जाएगी। इसके साथ ही 50 हज़ार रुपये लिविंग एक्सपेंस के रूप में दिए जाएंगे।




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