
महाराष्ट्र की राजर्षि शाहू महाराज छात्रवृत्ति योजना में हाल ही में किए गए नीतिगत बदलावों के खिलाफ दायर जनहित याचिका (PIL) को बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने तो 18 जून को खारिज कर दिया था, लेकिन इसके लाभार्थियों को जल्द ही कुछ राहत मिल सकती है। इस सम्बन्ध में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही एक नया सरकारी संकल्प (गवर्नमेंट रेजोलुशन) जारी किया जाएगा। यह जानकारी याचिकाकर्ता और एनजीओ ‘द प्लेटफॉर्म’ के सदस्य राजीव खोबरागड़े ने दी है, जिनकी 6 जुलाई को उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात हुई है।
राजीव खोबरागड़े ने कहा, “अदालत ने जनहित याचिका को खारिज करते हुए कहा कि वह नीति-निर्माण सम्बन्धी निर्णयों में हस्तक्षेप नहीं करेगी। हालांकि, निर्णय के 15 दिन से अधिक समय हो गया है, और अदालत ने अभी तक अपना आदेश अपलोड नहीं किया है। हमारा मानना है कि यह देरी इसलिए हुई क्योंकि हमारी याचिका मजबूत और संवैधानिक थी।” खोबरागड़े ने कहा कि आदेश आने के बाद वह समीक्षा याचिका दायर करेंगे और यदि आवश्यक हुआ तो मामले को सर्वोच्च न्यायालय में ले जाएंगे।
गौरतलब है कि ‘द प्लेटफॉर्म’ ने इस मुद्दे पर चर्चा के लिए उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से 6 जुलाई को मुलाकात की। उन्हें आश्वासन दिया गया कि जल्द ही नया गवर्नमेंट रेजोलुशन यानी जीआर जारी किया जाएगा। खोबरागड़े ने कहा, “हमने उन्हें बताया कि आवेदन की अंतिम तिथि इस महीने की 12 तारीख है, लिहाजा उनसे समाधान के प्रयास में तेजी लाने का अनुरोध किया। हालांकि उन्होंने हमें समाधान का आश्वासन दिया है, लेकिन वे राजनेता हैं, इसलिए आप कभी नहीं जान सकते।”
राजर्षि शाहू महाराज छात्रवृत्ति योजना के तहत अनुसूचित जाति (एससी) और नव-बौद्ध समुदाय के छात्र-छात्राओं को विदेश में मास्टर और शोध (पीएचडी) पाठ्यक्रम के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। हालांकि, इस साल के जीआर में तीन नई शर्तें शामिल की गई हैं, जिससे इसकी पहुंच और समावेशिता को लेकर बहस छिड़ी हुई है। नई शर्तों में एससी छात्रों के लिए मास्टर कोर्स के लिए 30 लाख रुपये और पीएचडी के लिए 40 लाख रुपये की सीमा शामिल है, जबकि पहले छात्रवृत्ति में पूर्ण कवरेज प्रदान किया जाता था। इसके अतिरिक्त, पात्रता अब 8 लाख रुपये की वार्षिक आय सीमा तक सीमित है। इसके अलावा, शैक्षणिक प्रदर्शन सीमा को कक्षा दसवीं से स्नातक/स्नातकोत्तर तक 55% से बढ़ाकर 75% कर दिया गया है।
संभावित नए जी.आर. को लेकर खोबरागड़े ने कहा, “हमें पूरा भरोसा है कि 75% मानदंड और सीमा हटा दी जाएगी; हालाँकि, हम वार्षिक आय सीमा के बारे में निश्चित नहीं हैं। यह आर्थिक मानदंड नहीं बल्कि सामाजिक मानदंड है, इसलिए आय सीमा रखने का कोई मतलब नहीं है, लेकिन मुझे नहीं लगता कि वे इसे हटाएंगे।” मंच ने 7 जुलाई को महाराष्ट्र विधानसभा के सदस्य डॉ. नितिन राउत से भी मुलाकात की। उन्होंने आश्वासन दिया था कि वे सदन में छात्रवृत्ति का मुद्दा उठाएंगे। आवेदन की अंतिम तिथि को करीब देखते हुए खोबरागड़े को यकीन है कि इसे बढ़ाया जाएगा और जल्द ही इसका समाधान निकाला जाएगा।




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