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समानता सुनिश्चित करने के लिए शिक्षा सबसे प्रभावशाली परिवर्तनकारी तंत्र: उपराष्ट्रपति धनखड़

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा है कि समानता सुनिश्चित करने के लिए शिक्षा सबसे प्रभावशाली परिवर्तनकारी तंत्र है। साथ ही उन्होंने कहा कि भारत का उदय क्रमिक, अजेय है और इसे वैश्विक संस्थाओं से प्रशंसा मिल रही है। अगले पांच वर्षों में भारत का उदय गुरुत्वाकर्षण बल को चुनौती देने वाले रॉकेट की तरह होगा।

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने किनरसी मोनजी इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज (एनएमआईएमएस) विश्वविद्यालय में भाषण देते हुए उक्त बातें कहीं। उन्होंने कहा कि “समानता सुनिश्चित करने के लिए शिक्षा सबसे प्रभावशाली परिवर्तनकारी तंत्र है। भारत को एक सोया हुआ दानव माना जाता था, लेकिन अब ऐसा नहीं है। हम आगे बढ़ रहे हैं, हमारा उदय क्रमिक, अजेय है और इसे वैश्विक संस्थाओं से प्रशंसा मिल रही है।”

धनखड़ ने कहा कि भारत वास्तव में उस स्तर पर आ गया है जहां वैश्विक संस्थाएं जो इसे सलाह देने की कोशिश कर रही थीं, वे इसकी सलाह ले रही हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह सब हाल ही में एक दशक में हुआ है। 

उन्होंने कहा, ‘‘जब हम अपनी स्वतंत्रता का शताब्दी समारोह मनाएंगे (आज से 23 वर्ष बाद 2047 में)… ऐसे में विकसित भारत के स्वप्न के साथ हम पर गहन जिम्मेदारी भी होगी। उच्च शिक्षण संस्थान वह आधारशिला हैं जिन पर इस दृष्टिकोण को साकार किया जाएगा, जो न केवल ज्ञान बल्कि नवाचार, उद्यमशीलता और सामाजिक मूल्यों का भी पोषण करेंगे।

Asmita Sarkar

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