
देवरहा बाबा की धरती उत्तर प्रदेश का देवरिया ज़िला अचानक चर्चा में आ गया है। इसकी वाजिब वजह भी है। दरअसल, यहां एक ऐसा संयोग बना है कि इस ज़िले को संभालने वाले, जिले के विकास में भूमिका निभाने वाले सभी महत्वपूर्ण ज़िम्मेदार लोग आईआईटियन हैं। यानी आईआईटी के प्रॉडक्ट हैं। यहां पदस्थापित एसपी, डीएम और सीडीओ तो आईआईटी से पासआउट हैं ही, लोकसभा चुनाव के बाद यहां से निर्वाचित सांसद शशांक मणि त्रिपाठी भी आईआईटी के ही स्टूडेंट रहे हैं। ऐसे में देवरिया की पहचान देश में ऐसे ज़िले के तौर पर बन गई है, जिसकी कमान आईआईटीयन्स के हाथों में है।
यूपी के देवरिया की जिलाधिकारी (DM)दिव्या मित्तल हैं जिनकी हाल ही यहां पोस्टिंग हुई है। दिव्या आईआईटी दिल्ली की स्टूडेंट रही हैं। इसके अलावा उन्होंने आईआईएम बेंगलुरू से भी पढ़ाई की है। उन्होंने सिंगापुर समेत विदेश में भी नौकरी की लेकिन मन नहीं लगा तो वापस आकर यूपीएससी की तैयारी की और आईएएस बन गईं।
इसी तरह यहां के पुलिस अधीक्षक (SP) संकल्प शर्मा हैं। संकल्प शर्मा ने आईआईटी रुड़की से एमटेक की पढ़ाई की है। इंडियन पुलिस सर्विस में आने से पहले वह आईटी सेक्टर में थे। संकल्प शर्मा की गिनती तेज तर्रार और ईमानदार पुलिस अफसरों में होती है। पुलिस विभाग में इन्हें नए-नए प्रयोग के लिए जाना जाता है।
जिले के मुख्य विकास अधिकारी यानी सीडीओ (CDO) प्रत्युष पांडे आईआईटी कानपुर के स्टूडेंट रहे हैं। उन्होंने अहमदाबाद आईआईएम से एमबीए भी किया है। प्रत्यूष ने न केवल पहले ही प्रयास में यूपीएससी की परीक्षा पास की बल्कि 21वीं रैंक के साथ टॉपर्स की सूची में शामिल थे।
वहीं नवनिर्वाचित सांसद शशांक मणि त्रिपाठी आईआईटी दिल्ली से पास आउट हैं जहां से उन्होंने बीटेक की पढ़ाई की है। उन्होंने कई साल विदेश में नौकरी भी की। फिर राजनीति के मैदान में उतरे और अब देवरिया लोकसभा क्षेत्र के सांसद बने हैं। रचनात्मक सोच के धनी शशांक एक लेखक, राजनीतिज्ञ और सामाजिक उद्यमी हैं। वह जागृति यात्रा और जागृति इंटरप्राइज सेंटर पूर्वांचल के संस्थापक भी हैं। देवरिया के विकास पर इनका खास फोकस है और इसके लिए इन्होंने एक मॉडल भी तैयार किया है।
यानी इस वक़्त देवरिया के MP, DM, SP और CDO चारों भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) आईआईटी के स्टूडेंट रहे हैं। और ये सभी नई ऊर्जा एवं रचनात्मक सोच के धनी हैं। इन सबकी सोच सकारात्मक हैं और सभी का एक लक्ष्य जिले का विकास करना है।
गौरतलब है कि पुराना जिला होने के बावजूद देवरिया जिले को विकास के मामले में काफी पिछड़ा माना जाता है। हालांकि यहां विकास और रोजगार की अपार सभावनाएं हैं, मगर नेतृत्व क्षमता के अभाव में जिले का समुचित विकास नहीं हो सका। ऐसे में लंबे समय से विकास की बाट जोह रहे जिले के लोगों की भी उम्मीदें काफी बढ़ गई है। माना जा रहा है कि आईआईटीयंस अधिकारियों की जोड़ी जिले के विकास को नया आयाम देगी।




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