
तमिलनाडु के बाद अब NEET के खिलाफ पश्चिम बंगाल विधानसभा में प्रस्ताव पारित हुआ है। बंगाल विधानसभा में NEET परीक्षा में धांधली के खिलाफ प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इसमें कहा गया है कि हाल ही में हुई परीक्षा में धांधली हुई थी। बंगाल सरकार चाहती है कि मेडिकल के लिए होने वाली इस परीक्षा से बंगाल को बाहर रखा जाए।
ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी की सरकार ने मंगलवार को नीट-यूजी मामले पर प्रस्ताव पेश किया था। इस पर बुधवार को चर्चा हुई और प्रस्ताव पारित हुआ। यह प्रस्ताव संसदीय कार्य मंत्री सोवनदेब चट्टोपाध्याय ने पेश किया था।
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के ठीक एक दिन बाद बंगाल विधानसभा ने यह प्रस्ताव पारित किया है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को ही कहा था कि नीट परीक्षा दोबारा आयोजित नहीं की जाएगी। बंगाल सरकार के शिक्षा मंत्री ब्रत्य बसु का भी इस संबंध में बयान सामने आया है।
उन्होंने कहा, ‘जब इन परीक्षाओं को केंद्र सरकार को सौंपा गया था, तो यह संघीय ढांचे को नुकसान पहुंचाने वाला कदम था। हमने इसका विरोध भी किया था। तब गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कहा था कि केंद्र को नीट परीक्षाएं आयोजित नहीं करानी चाहिए। अब वे देश के प्रधानमंत्री हैं।’
वहीं, टीएमसी सरकार के इस प्रस्ताव का भाजपा की ओर से विरोध किया गया। भाजपा के शंकर घोष ने कहा, ‘जिन लोगों ने विधानसभा में ऐसा प्रस्ताव लाया है, वे खुद शिक्षा व्यवस्था में आकंठ भ्रष्टाचार में डूबे हुए हैं। तृणमूल कांग्रेस और पारदर्शिता का आपस में कोई संबंध नहीं है।’




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