
ट्रेनी आईएएस अफसर रही पूजा खेडकर को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट से बड़ा झटका लगा। कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। इससे पहले वह अपनी अफसरी भी गंवा चुकी हैं। संघ लोक सेवा आयोग यानी यूपीएससी (UPSC) ने उनकी अस्थाई उम्मीदवारी को रद्द कर दिया था और साथ ही उन पर भविष्य में होने वाली यूपीएससी की किसी भी परीक्षा में शामिल होने पर भी रोक लगा दी थी। अब कोर्ट ने उन्हें अग्रिम जमानत देने से भी इनकार कर दिया।
बता दें कि उनके खिलाफ यूपीएससी की शिकायत पर दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एफआईआर दर्ज की थी। अग्रिम जमानत से इंकार करते हुए पटियाला हाउस कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को यह भी आदेश दिया कि वह यूपीएससी परीक्षा में फर्जीवाड़ा करने वाले बाकी कैंडिडेट्स की भी जांच की जाए। अगर यूपीएससी के किसी कर्मचारी ने पूजा की मदद की हो, तो उसकी भी जांच हो।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश देवेन्द्र कुमार जंगाला ने कहा कि दिल्ली पुलिस को इस बात की भी जांच करनी चाहिए कि क्या यूपीएससी के अंदर से किसी ने खेडकर की मदद की थी। न्यायाधीश ने मामले में जांच का दायरा बढ़ाते हुए दिल्ली पुलिस को यह जांच करने का निर्देश भी दिया कि क्या अन्य किसी ने भी बिना पात्रता के ओबीसी और दिव्यांग कोटे के तहत लाभ उठाया है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (एएसजे) देवेन्द्र कुमार जंगाला ने खेडकर को अग्रिम जमानत देने से इनकार करते हुए अपने 19 पृष्ठों के फैसले में कहा कि आरोपी पूजा मनोरमा दिलीप खेडकर के खिलाफ आरोप गंभीर और संगीन हैं जिनकी गहन जांच की आवश्यकता है। संपूर्ण षडयंत्र का पता लगाने और षडयंत्र में शामिल अन्य व्यक्तियों की संलिप्तता स्थापित करने के लिए आरोपी से हिरासत में पूछताछ आवश्यक है।
धोखाधड़ी और जालसाजी के इस केस में गिरफ्तारी से बचने के लिए पूजा ने अग्रिम जमानत याचिका लगाई थी। कोर्ट में यूपीएससी के वकील ने कहा था कि उन्होंने सिस्टम को धोखा दिया है। वह एक साधन संपन्न व्यक्ति हैं और उनके द्वारा कानून का दुरुपयोग करने की संभावना बनी हुई है। पुलिस ने भी तर्क दिया कि अगर खेडकर को अग्रिम जमानत दी जाती है तो वह जांच में सहयोग नहीं करेगी।
बता दें कि पूजा खेडकर पर उम्र, माता-पिता की गलत जानकारी, पहचान बदलकर तय सीमा से ज्यादा बार सिविल सर्विसेस का एग्जाम देने का आरोप है। यूपीएससी द्वारा की गई जांच के अनुसार खेडकर ने अपना नाम, अपने पिता और माता का नाम, अपनी तस्वीर/हस्ताक्षर, अपनी ईमेल आईडी, मोबाइल नंबर और पता बदलकर अपनी पहचान बदलकर परीक्षा नियमों के तहत स्वीकार्य सीमा से परे धोखाधड़ी से प्रयास किए। यूपीएससी ने दस्तावेजों की जांच के बाद पूजा को सीएसई-2022 नियमों के उल्लंघन का दोषी पाया था। इसके बाद यूपीएससी ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी।




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