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बस गए विदेश में, वेतन ले रहे देश में; गुजरात में हुआ ऐसे शिक्षकों का खुलासा  

गुजरात कई मायनों में ग़ज़ब है। अब यहाँ एक नए किस्म का मामला प्रकाश में आया है जो राज्य के सरकारी स्कूलों के शिक्षकों से जुड़ा है। दरअसल, यहाँ के सरकारी स्कूलों में बड़ी तादाद में ऐसे शिक्षक हैं जो लम्बे अरसे से स्कूल नहीं आ रहे। लेकिन इसके बावजूद नौकरी में न सिर्फ बने हुए हैं बल्कि वेतन भी उठा रहे हैं। हैरत तो यह कि इनमें से अच्छी खासी संख्या ऐसे शिक्षकों की भी है जो देश में हैं ही नहीं, विदेशों में जा बसे हैं। जी हां, बस गए विदेश में, वेतन ले रहे देश में। 

ऐसा ही एक मामला पिछले दिनों बनासकांठा जिले के पंचा गांव से सामने आया था, जहां एक सरकारी स्कूल की शिक्षिका के कथित तौर पर अमेरिका में बसने और लगभग आठ वर्षों से ड्यूटी से अनुपस्थित रहने के बावजूद वेतन पर बने होने का प्रभारी प्रिंसिपल ने दावा किया था। इसके बाद सरकार ने इसकी जांच के आदेश दिए थे। अब जब हर जगह से ऐसे टीचर्स को खोजने के लिए लम्बे समय से स्कूल से गैरहाजिर चल रहे शिक्षकों का डेटा इकट्ठा किया जाना शुरू हुआ, तो सारी पोलपट्टी खुलने लगी। अब तक राज्य के कई जिलों से ऐसे शिक्षकों का पता चला है जो गलत तरह से लंबी छुट्टी पर हैं, वहीं करीबन 40 ऐसे शिक्षक भी मिले हैं जो लंबे समय से विदेश में बैठे हैं। हद यह कि विदेश में बसने के बावजूद ये गुजरात के सरकारी स्कूल के न सिर्फ अब तक शिक्षक बने हुए हैं, बल्कि तनख्वाहें भी ले रहे हैं। 

इनमें अहमदाबाद, बनासकांठा, महेसाणा, आनंद, वडोदरा, सूरत और कच्छ के शिक्षक शामिल हैं। अहमदाबाद में 7 ऐसे शिक्षकों का पता  चला है जो विदेश में हैं। मामले सामने आने के बाद गुजरात के शिक्षा राज्य मंत्री प्रफुल पानसेरिया ने अधिकारियों के साथ एक बैठक कर शिक्षकों के खिलाफ सख्त कार्यवाही का आदेश दिया है। उन्होंने ये भी कहा कि भविष्य में नियमों का गलत इस्तेमाल न हो, इस दिशा में भी क्या बदलाव किए जा सकते है, उसे लेकर भी कोशिशें जारी हैं। 

गौरतलब है कि कुछ दिनों पहले बनासकांठा जिले के पंचा गांव में एक प्राथमिक विद्यालय की प्रभारी प्रिंसिपल ने दावा किया था कि शिक्षिका भावना पटेल हर साल केवल एक महीने के लिए ड्यूटी पर आने और अमेरिका में रहने के कारण अनधिकृत छुट्टी पर जाने के बावजूद स्कूल के वेतन पर बनी हुई है। प्रिंसिपल के आरोपों के बारे में जानने के बाद, गुजरात के शिक्षा मंत्री कुबेर डिंडोर ने जांच के आदेश दिए थे।

वहीं शिक्षा राज्य मंत्री प्रफुल पंशेरिया ने कहा था, “शिक्षिका को जनवरी से एक भी रुपया वेतन नहीं मिला है। वह बनासकांठा के दांता तालुका में 11 शिक्षिकाओं में से एक हैं। अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत प्राथमिक रिपोर्ट के अनुसार, वह नियमित अंतराल पर छुट्टियां लेती रही हैं। अगर वह विदेश में रहने के बावजूद किसी अन्य लाभ उठाने की दोषी पाई जाती हैं, तो हम कार्रवाई करेंगे।”

स्कूल की प्रभारी प्रिंसिपल पारुल मेहता ने मीडिया को यह बताया था कि 2016 में अमेरिका में बसने के बावजूद पटेल पेरोल पर हैं। मेहता ने कहा था, “भावनाबेन पटेल 2016 में अमेरिका में बस गई थीं। लेकिन, अपनी सेवा जारी रखने के लिए, वह साल में एक बार स्कूल आती हैं और एक महीने तक सेवा करती हैं। यह कई सालों से चल रहा है। उनकी लंबी अनुपस्थिति के कारण बच्चे परेशान हैं। उन्हें या तो इस्तीफा दे देना चाहिए या ड्यूटी पर वापस आ जाना चाहिए।”

उन्होंने 18 जुलाई का एक पत्र भी साझा किया था, जिसमें उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारी विनुभाई पटेल से शिक्षिका के खिलाफ कार्रवाई करने का आग्रह किया, जो 2027 में सेवानिवृत्त होंगी। मेहता ने दावा किया कि शिक्षिका स्कूल मस्टर के अनुसार “बिना वेतन के छुट्टी” पर होने के बावजूद हर साल दो महीने का वेतन लेती है।

डीईओ ने अपने जवाब में कहा कि भावना पटेल पिछले आठ महीनों से अनधिकृत छुट्टी पर हैं और उन्हें जनवरी से वेतन नहीं मिला है। डीईओ ने कहा था कि राज्य सरकार के नियमों के अनुसार, शिक्षकों को सेवा से तभी बर्खास्त किया जा सकता है जब वे एक साल या उससे अधिक समय तक अनुपस्थित रहें।

बहरहाल, बीते हफ्ते गुजरात के बनासकांठा में विदेश में रहने वाली ऐसी टीचर का मामला सामने आने के बाद लगातार पाए जा रहे हैं। इसने गुजरात में शिक्षा के हालात का भी पर्दाफाश किया है। गुजरात में शिक्षा व्यवस्था की मॉनिटरिंग गांधीनगर स्थित ‘विद्या समीक्षा केंद्र’ से की जाती है। लेकिन, इन घटनाओं ने विद्या समीक्षा केंद्र के अधिकारियों की मॉनिटरिंग पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। 

गुजरात कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता मनीष दोशी ने विद्या समीक्षा केंद्र के कामकाज पर सवाल उठाते हुए कहा, ‘छात्रों और शिक्षकों की दैनिक रियल टाइम ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली के दावे के बाद भी यह लापरवाही शिक्षा विभाग के ध्यान में क्यों नहीं आई? विद्या समीक्षा केंद्र के डैशबोर्ड के माध्यम से मुख्यमंत्री के डैशबोर्ड को भी निरंतर डेटा प्रदान किया जाता है। फिर लगातार अनुपस्थित शिक्षकों से शिक्षा विभाग अनजान क्यों रहा? विदेश जाने के लिए 90 दिन की छुट्टी दी जाती है। यदि कोई एक वर्ष से अधिक छुट्टी पर है तो उसे बर्खास्त करने का प्रावधान है, फिर भी लगातार अनुपस्थित रहने वाले शिक्षकों पर कार्रवाई क्यों नहीं की गयी?’

मनीष दोशी ने आगे सरकार से पूछा है कि शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया, लेकिन उन्हें अब तक बर्खास्त क्यों नहीं किया गया? और इस मामले में लापरवाह शिक्षकों पर कब ठोस कार्रवाई होगी?  

 

Asmita Sarkar

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