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देश के अलग-अलग स्कूल एजुकेशन बोर्ड के बीच के अंतर को दूर करने की सरकार कर रही पहल 

एनसीईआरटी के संगठन ‘परख’ द्वारा तैयार की गई एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि देश के अलग-अलग शिक्षा बोर्ड्स के सिलेबस और मूल्यांकन प्रक्रिया में भारी असमानता के कारण बच्चों को स्किल आधारित शिक्षा देने का सपना अब भी हकीकत बनने से दूर है। पढ़ाई को बोझ की परिभाषा से बाहर निकालने की सोच धरातल पर नहीं उतर पा रही है। यही वजह है कि सरकार अब देश के अलग-अलग स्कूल एजुकेशन बोर्ड के बीच के अंतर को दूर करने की तैयारी कर रही है। ‘परख’ की रिपोर्ट के आधार पर शिक्षा विभाग जल्द ही कोई ठोस कदम उठा सकता है।

 ‘परख’ की रिपोर्ट के अनुसार, देश में 69 मान्यता प्राप्त शिक्षा बोर्ड और 14.8 लाख एफिलिएटेड स्कूल हैं, जहां 26.5 करोड़ बच्चे प्री-प्राइमरी से लेकर 12वीं तक की पढ़ाई कर रहे हैं। लेकिन इन बोर्ड्स के सिलेबस, विषय, और मूल्यांकन प्रक्रिया में बड़ा फर्क है। इस असमानता के चलते छात्रों को बराबरी के अवसर नहीं मिल पाते। इसी समस्या का हल खोजने के लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने सभी स्कूल बोर्ड्स का विस्तृत विश्लेषण कराया है। 

बताया जा रहा है कि सरकार द्वारा इस रिपोर्ट का ड्राफ्ट सभी बोर्ड्स के साथ साझा किया गया है। उनके सुझाव मिलने के बाद फाइनल गाइडलाइंस बनाई जाएंगी। इस पूरी प्रक्रिया का मकसद है कि देश भर के स्कूल बोर्ड्स के सिलेबस, परीक्षा की तिथियां और मूल्यांकन पैटर्न में एकरूपता लाई जाए। ताकि 12वीं के बाद छात्रों को विभिन्न राष्ट्रीय प्रतियोगी परीक्षाओं में समान अवसर मिल सके।

परख की हेड और सीईओ, प्रो. इंद्राणी भादुड़ी का भी कहना है कि स्कूल शिक्षा बोर्ड्स के सिलेबस और मूल्यांकन प्रक्रिया में समानता लाना आज की जरूरत है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) और नैशनल करिकुलम फ्रेमवर्क (स्कूल एजुकेशन) ने भी मूल्यांकन प्रक्रिया को फिर से डिजाइन करने और समग्र शिक्षा एवं विकास के लिए व्यापक सुधारों की सिफारिश की है। वोकेशनल और स्किल कोर्सेज को भी बढ़ावा देने की वकालत की गई है।

वर्तमान में, 38.80% स्कूल बोर्ड्स ने आर्ट और क्राफ्ट को अनिवार्य विषय के रूप में शामिल किया है, 61.11% ने फिजिकल एजुकेशन को, जबकि केवल 9.52% बोर्ड्स ने स्किल सब्जेक्ट्स को अनिवार्य बनाया है। साथ ही, 40% बोर्ड केवल एक सप्लीमेंटरी का विकल्प दे रहे हैं, 29% दो सप्लीमेंटरी का, और 7% बोर्ड्स ने सप्लीमेंटरी का कोई विकल्प ही नहीं दिया है।

प्रो. भादुड़ी का मानना है कि क्लास 9 में 70%, 10 में 50%, 11 में 40% और क्लास 12 में 30% वेटेज फॉर्मेटिव असेसमेंट को दिया जाना चाहिए। जबकि क्लास 12 में शेष 70% वेटेज लिखित परीक्षा को मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि बेहतरीन प्रैक्टिसेस को अपनाकर बोर्ड्स के लिए कॉमन गाइडलाइंस तैयार करने की जरूरत है, ताकि सभी छात्रों को समान अवसर मिल सके।

प्रो. भादुड़ी का कहना है कि अभी 25% बोर्ड 50% से ज्यादा MCQ क्वेश्चन देते हैं और 32% बोर्ड में 40% क्वेश्चन वेरी शॉर्ट टाइप होते हैं। कुछ बोर्ड में 90% से ज्यादा सवाल आसान होते हैं तो कुछ में 50% आसान होते हैं। यह अंतर दूर करना होगा। इसी बड़े अंतर को देखने के बाद परख ने सिफारिश की है कि क्लास 9 में 70% वेटेज फॉर्मेटिव और 30% वेटेज समैटिव (लिखित परीक्षा को मिलनी चाहिए। क्लास 10 में यह रेश्यो 50-50 का होना चाहिए। क्लास 11 में 60% और 12वीं में 70% वेटेज लिखित परीक्षा की होनी चाहिए। वोकेशनल एजुकेशन, आर्ट एजुकेशन, फिजिकल एजुकेशन एंड वेल बीइंग जैसे विषयों में 25% वेटेज लिखित परीक्षा की हो और 75% डेमोस्ट्रेशन बेस्ड असेस्मेंट (demonstration based assessment) हो।

Asmita Sarkar

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