Edinbox Hindi

तमिलनाडु के छात्रों की सीएम स्टालिन से अपील, मिड डे मील योजना का बारहवीं कक्षा तक किया जाए विस्तार

तमिलनाडु के स्कूलों में चल रही मध्याह्न भोजन योजना यानी मिड डे मील स्कीम को बारहवीं कक्षा तक के छात्रों के लिए विस्तार किये जाने की मुख्यमंत्री एमके स्टालिन से अपील की गयी है। यह अपील गंदरवकोट्टई सरकारी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के छात्र रहे आर जनार्थनन, जिन्होंने हाल ही में 7.5% आरक्षण के तहत पुदुक्कोट्टई मेडिकल कॉलेज में प्रवेश प्राप्त किया है, ने की है।

जनार्थनन का कहना है कि उसे और उसके सहपाठियों को अपने स्कूल के दिनों में भूख का सामना करना पड़ा। गरीब-अभावग्रस्त छात्रों की पीड़ा और संघर्षों को उजागर करते हुए जनार्थनन ने कहा कि ये छात्र सुदूर इलाकों से पढ़ाई के लिए स्कूल आते हैं और ज्यादातर समय भूखे रहते हैं। लिहाजा उन्होंने सरकार से मिड डे मील स्कीम को बारहवीं कक्षा तक के छात्रों के लिए विस्तार किये जाने के अपने अनुरोध पर विचार करने का आग्रह किया है।

हाल ही में मेडिकल कॉलेज में प्रवेश प्राप्त करने वाले जनार्थनन को अपने स्कूल के दिनों में आजीविका के लिए दुकानों और घरों तक गाय का दूध पहुंचाने तक का काम करना पड़ा है। जब वह राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) की तैयारी कर रहे थे, तब उन्हें स्कूल के अलावा मीलों पैदल चलना पड़ता था। उनकी तरह ही उनके कई अन्य दोस्तों को भी पढ़ाई के साथ-साथ अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए काम करने पड़ते हैं।

जनार्थनन का कहना है कि “मैंने अपने जैसे सैकड़ों छात्रों को दिन में भूखे मरते देखा है क्योंकि वे लंच बैग नहीं ले जाते हैं। ऐसे में कभी मध्याह्न भोजन के आयोजक की कृपा से, तो कभी-कभी बचा हुआ खाना हमें मिल जाता है जिससे हम अपने पेट की भूख को  शांत कर पाते हैं। या फिर हमें बाहर का सस्ता और अस्वास्थ्यकर खाना खाने को मजबूर होना पड़ता है।”

मुथुकुलम के उसी स्कूल में कक्षा 12 की पढ़ाई कर रहे एक अन्य छात्र ने कहा, “मैं सुबह 7 बजे ही निकल जाता हूं और स्कूल पहुंचने के लिए बस पकड़ लेता हूं, जो 15 किलोमीटर दूर है। चूंकि मुझे रोजाना सुबह 8 बजे विशेष कक्षा में जाना होता है, इसलिए मैं खाना नहीं ले जा पाता क्योंकि तब तक मेरे माता-पिता खाना नहीं बना पाते। मेरे पास जो थोड़े पैसे होते हैं, उससे मैं अपने स्कूल के बाहर तरह-तरह के चावल खाता हूं, अगर नहीं तो मैं भूखा रहूंगा और घर पहुंचने तक इंतजार करूंगा।”

शिक्षाविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का तर्क है कि कक्षा 11 और 12 के छात्रों को मध्याह्न भोजन उपलब्ध कराने से न केवल उनके स्वास्थ्य और कल्याण में सुधार होगा बल्कि उनके शैक्षणिक प्रदर्शन में भी सुधार होगा।

स्कूल के शिक्षक ए. मणिकंदन ने बताया कि उन्होंने चेन्नई सचिवालय में समाज कल्याण विभाग से अपील की है कि दोपहर के भोजन की योजना को कक्षा ग्यारहवीं और बारहवीं के छात्रों तक भी बढ़ाया जाए, क्योंकि सुबह और शाम की विशेष कक्षाओं के बीच पूरे दिन ऊर्जा और शक्ति के साथ काम करना उनके लिए ज़रूरी है। उन्होंने यह भी कहा, “सुबह 8 बजे से शाम 6 बजे तक छात्र नियमित स्कूल के साथ-साथ विशेष कक्षाओं में भाग लेने के लिए स्कूल में रहते हैं। हम कभी-कभी भोजन की व्यवस्था करते हैं, लेकिन इस समस्या के समाधान के लिए स्थायी समाधान की आवश्यकता है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री को इस मांग पर विचार करना चाहिए, क्योंकि इस योजना के लिए न्यूनतम राशि आवंटित करने की आवश्यकता है।”

Asmita Sarkar

Add comment

Recent posts

Most popular

Most discussed