
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस की छात्र शाखा तृणमूल छात्र परिषद के 27वें स्थापना दिवस पर इस बात पर जोर दिया कि देश के सभी छात्रों और युवाओं की एक महान सामाजिक भूमिका है। उन्होंने कहा, “समाज को संजोकर नए दिन का सपना देना, अपनी संस्कृति को जिंदा रखना छात्र समाज का काम है। मैं आज सभी से अपील करती हूं कि इस प्रयास में प्रतिबद्ध रहें। मेरे प्यारे छात्रों अच्छे से रहें और स्वास्थ्य रहें और उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रतिबद्ध रहें।”
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए सीएम ममता बनर्जी ने कहा, “आज तृणमूल छात्र परिषद के स्थापना दिवस के मौके पर, मैं इसे अपनी बहन, जिनकी कुछ दिन पहले ही आरजी कर मेडिकल अस्पताल में हत्या कर दी गई, को समर्पित करती हूं। अपनी हार्दिक संवेदना व्यक्त करते हुए मैं इस घटना पर तत्काल निवारण की मांग करती हूं। हमारी संवेदनाएं उन सभी महिलाओं के साथ हैं, जो अमानवीय घटनाओं की शिकार हुई। उन सभी के लिए मैं दिल के अंतरस्थल से दुख व्यक्त करती हूं। मैं माफी चाहती हूं।’
बता दें कि नौ अगस्त को आरजी कर अस्पताल के सेमिनार हॉल में प्रशिक्षु महिला डॉक्टर का शव मिला था। इस घटना के बाद देशभर के डॉक्टर सड़कों पर उतकर न्याय और महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी कड़ी में आज भाजपा ने बंगाल बंद का आह्वान किया है।
भाजपा के बंद पर सीएम ममता बनर्जी ने कहा कि हमने आज का दिन आरजी कर डॉक्टर को समर्पित किया है। हम न्याय चाहते हैं, लेकिन भाजपा ने आज बंद का आह्वान किया है। वे न्याय नहीं चाहते, वे केवल बंगाल को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। ममता ने कहा कि हम इस बंद का समर्थन नहीं करते।
उन्होंने आगे कहा, “भाजपा ने कभी भी उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और यहां तक कि मणिपुर के मुख्यमंत्रियों के इस्तीफे की मांग नहीं की। हमने कल (नबान्ना अभियान रैली) की तस्वीरें देखीं, मैं स्थिति को अच्छी तरह से संभालने के लिए पुलिस को सलाम करती हूं।”
उन्होंने कहा कि आरजी कर महिला डॉक्टर दुष्कर्म-हत्या मामले की जांच सीबीआई कर रही है। 16 दिन से केंद्रीय जांच एजेंसी मामले की जांच कर रही है। कहां है न्याय? कहां तक पहुंची जांच? ममताने कहा कि ऐसे कृत्यों की केवल एक ही सजा है- फांसी पर लटकाना। अगले हफ्ते हम विधानसभा सत्र बुलाएंगे और दुष्कर्मियों के लिए मृत्युदंड सुनिश्चित करने के लिए 10 दिनों के भीतर एक विधेयक पारित करेंगे। हम इस विधेयक को राज्यपाल के पास भेजेंगे। अगर वह इसे पारित नहीं करते हैं, तो हम राजभवन के बाहर धरना देंगे। यह विधेयक पारित होना ही चाहिए और वह इस बार जवाबदेही से बच नहीं सकते।




Add comment