
महाराष्ट्र के पुणे में अर्न्स्ट एंड यंग (ईवॉय) कंपनी के पुणे ऑफिस में 26 साल की सीए एना सेबेस्टियन की मौत मामले में श्रम विभाग के अधिकारी जांच करने पहुंचे। जांच में सामने आया कि ईवॉय कंपनी 2007 से स्टेट परमिट के बिना काम कर रही है।
महाराष्ट्र के एडिशनल श्रम कमिश्नर शैलेंद्र पोल ने कहा कि कंपनी के पास शॉप एंड एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत दिया जाने वाला सर्टिफिकेट नहीं था। यह कानून किसी भी कंपनी में कर्मचारी के अधिकतम 9 घंटे (हफ्ते में 48 घंटे) की ड्यूटी करने की इजाजत देता है। इस पर ईवॉय कंपनी को जवाब देने के लिए 7 दिन का वक्त दिया है।
दरअसल, एना की 20 जुलाई को कार्डियक अरेस्ट से मौत हुई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, एना पर वर्कलोड के चलते कार्डियक अरेस्ट आया था। मौत से कुछ दिन पहले जब माता-पिता एना से मिलने पुणे आए तब एना ने सीने में दर्द की शिकायत की। डॉक्टर को दिखाने पर पता चला था कि ऑफिस वर्कलोड के चलते एना परेशान थी।
एना के पेरेंट्स का कहना है कि उनकी बेटी डॉक्टर से मिलने के बाद ऑफिस लौट गई थी। रात में देर से घर आई और अगली सुबह फिर जल्दी चली गई। जिसके बाद 20 जुलाई को एना की मौत हो गई। जिस कंपनी के लिए काम करते हुए एना की जान गई, उस कंपनी से कोई भी उसके अंतिम संस्कार तक में शामिल नहीं हुआ। एना की मौत से पहले कई कर्मचारी रिजाइन कर चुके थे।
अनीता ने दावा किया है कि कई कर्मचारी वर्कलोड के चलते रिजाइन कर चुके थे। इसलिए उनकी बेटी के बॉस ने एना को रिजाइन करने से रोक दिया था। साथ ही कहा था कि उस टीम के बाकी लोगों की राय बदलनी चाहिए। एना का मैनेजर अक्सर क्रिकेट मैचों के दौरान बैठक को रीशेड्यूल करता था। दिन खत्म होने पर उसे काम सौंपता, जिससे उनका तनाव बढ़ता जा रहा था।




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