
भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने विभिन्न बीमारियों के इलाज की खोज में सौर ऊर्जा का इस्तेमाल करने का फैसला लिया है, जिसके लिए एनटीपीसी विद्युत व्यापार निगम के साथ समझौता किया है। इसके तहत आईसीएमआर के 15 संस्थानों की छतों पर कुल 4,559 किलोवाट की संयुक्त क्षमता वाले सोलर पैनल स्थापित होंगे। आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने कहा कि इस साझेदारी का उद्देश्य देशभर में आईसीएमआर संस्थानों के लिए सौर ऊर्जा का उपयोग करना है।
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने बताया कि स्वास्थ्य सेवा और अनुसंधान क्षेत्र में सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए ‘आत्मनिर्भर भारत’ और स्वच्छ, हरित भविष्य के दृष्टिकोण के अनुरूप भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद ने एनटीपीसी विद्युत व्यापार निगम के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी का उद्देश्य देश भर में परिषद के संस्थानों के लिए सौर ऊर्जा का प्रयोग करना है।
भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद और एनटीपीसी विद्युत व्यापार निगम के बीच समझौते के तहत, एनवीवीएन 15 आईसीएमआर संस्थानों में 4,559 किलोवाट की संयुक्त क्षमता वाले रूफटॉप सोलर पैनल की आपूर्ति, स्थापना, परीक्षण, कमीशन और रखरखाव करेगा। इस परियोजना में ग्रिड से जुड़ी सौर परियोजनाओं के लिए एक पावर परचेज एग्रीमेंट (पीपीए) भी शामिल है, जो अगले 25 वर्षों के लिए एक निश्चित सौर टैरिफ की पेशकश करता है, जिससे आईसीएमआर के संचालन के लिए दीर्घकालिक लागत दक्षता और स्थिरता सुनिश्चित होती है।
आधिकारिक बयान के मुताबिक यह साझेदारी भारत के राष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाती है, स्वास्थ्य सेवा अनुसंधान में एक स्थायी भविष्य को बढ़ावा देती है, और आईसीएमआर को जैव चिकित्सा क्षेत्र में हरित ऊर्जा अपनाने में अग्रणी बनाती है।




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