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बिहार की टीएमबीयू और बांग्लादेश की वरेन्द्र यूनिवर्सिटी के बीच हुआ समझौता, स्टूडेंट्स को होगा फायदा 

अब तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (टीएमबीयू) के छात्र बांग्लादेश के विश्वविद्यालयों में रिसर्च और शिक्षा ग्रहण कर पाएंगे। इसके लिए टीएमबीयू और बांग्लादेश के राजशाही स्थित वरेन्द्र यूनिवर्सिटी के बीच शिक्षण, शोध, अनुसंधान और नवाचार सहित कई क्षेत्रों में संयुक्त करार पर सहमति बन गई। एमओयू के कागजात पर वरेंद्र यूनिवर्सिटी बांग्लादेश के वाइस चांसलर प्रो. आनंद कुमार साहा और टीएमबीयू के कुलपति प्रो. जवाहर लाल ने दस्तखत किए हैं। हस्ताक्षरित एमओयू का पत्र वरेन्द्र यूनिवर्सिटी बांग्लादेश द्वारा टीएमबीयू को भेजा गया है। 

टीएमबीयू के पीआरओ डॉ दीपक कुमार दिनकर ने बताया कि वरेन्द्र विश्वविद्यालय राजशाही बांग्लादेश ने तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के साथ साझा शिक्षण, रिसर्च, अनुसंधान, नवाचार, फैकल्टी एक्सचेंज, स्टूडेंट एक्सचेंज, सामाजिक-सांस्कृतिक गतिविधियों सहित कई क्षेत्रों में एमओयू करने को लेकर दिलचस्पी दिखाई है। 

बांग्लादेश की प्रतिनिधि के तौर पर वरेन्द्र विश्वविद्यालय राजशाही के सोशियोलॉजी विभाग की फैकल्टी रौनक आरा परवीन ने 11 मई 2023 को टीएमबीयू के कुलपति प्रो. जवाहर लाल से शिष्टाचार भेंट कर दोनों संस्थानों के बीच एमओयू के प्रस्ताव के कागजात सौंपे थे। एमओयू से संबंधित उक्त प्रस्ताव वरेन्द्र यूनिवर्सिटी बांग्लादेश के कार्यकारी कुलपति के द्वारा टीएमबीयू को दिया गया था। तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जवाहर लाल ने कहा कि यह एक अच्छी और स्वागत योग्य पहल है। इससे दोनों ही विश्वद्यालयों के बीच ज्ञान का आदान-प्रदान हो सकेगा।  इसके साथ ही फैकल्टी और स्टूडेंट एक्सचेंज होने से शिक्षण, शोध, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में बेहतर पहल किया जा सकेगा. इससे नए और इनोवेटिव आइडियाज आएंगे। इस पहल से टीएमबीयू का नाम राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ेगा। 

कुलपति ने कहा कि करार हो जाने के बाद अब दोनों ही संस्थानों के बीच ज्वाइंट रिसर्च के कार्य किए जायेंगे। इससे पठन-पाठन की गुणवत्ता भी बढ़ेगी। दोनों संस्थानों के बीच सेमिनार, कॉन्फ्रेंस और वर्कशॉप आदि का भी आयोजन संयुक्त रूप से हो सकेगा। सामाजिक, शैक्षणिक, आर्थिक और सांस्कृतिक गतिविधियों को भी इससे बढ़ावा मिलेगा। यहां के छात्र बांग्लादेश के संस्थान के साथ जुड़कर पढ़ाई और रिसर्च करेंगे। उन्होंने बताया कि क्वालिटी एजुकेशन तभी होगा जब नॉलेज का आदान प्रदान हो सकेगा। यह एक बड़ी पहल है। आने वाले दिनों में कई अन्य देशों के साथ भी एमओयू की प्रक्रिया शुरू करने का प्रयास किया जाएगा। 

इसके पहले तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय का यूएसटीएम मेघालय, ग्लोबल लीडरशिप फाउंडेशन नई दिल्ली, जूलोजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, बीएयू सबौर आदि संस्थानों के साथ एमओयू हो चुका है।

Asmita Sarkar

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