
कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में मंगलवार को सामूहिक इस्तीफे दिए गए। यहां के करीब पचास सीनियर डॉक्टरों ने आमरण अनशन कर रहे आंदोलनकारी जूनियर डॉक्टरों के साथ एकजुटता जताते हुए पद से इस्तीफा दे दिया है। एक बैठक में डॉक्टरों ने सामूहिक इस्तीफा का फैसला लिया।
बताया गया है कि मंगलवार को मेडिकल कॉलेज में कई डिपार्टमेंट और उनके हेड्स की मीटिंग हुई। इस मीटिंग में आंदोलनकारी जूनियर डॉक्टरों के समर्थन में इस्तीफा देने का फैसला लिया गया। जूनियर डॉक्टर एक महिला डॉक्टर की हत्या और दुष्कर्म के मामले में न्याय की मांग करते हुए अनशन पर हैं।
एक सीनियर मेंबर ने कहा कि जूनियर डॉक्टर्स एक मकसद के लिए आमरण अनशन कर रहे हैं। हम उनके साथ मजबूती से खड़े हैं और यह संदेश देने के लिए हमने इस्तीफे दिए हैं। छह जूनियर डॉक्टर अपनी मांगों को लेकर पिछले चार दिनों से आमरण अनशन पर हैं, लेकिन मुद्दे को हल रने के लिए किसी उपयुक्त प्राधिकारी की ओर से अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। उन्होंने कहा कि हम किसी बाहरी दबाव में झुकने वाले नहीं हैं। विरोध तब तक जारी रहेगा, जब तक सभी मांगें पूरी नहीं हो जातीं।
जूनियर डॉक्टर 5 अक्टूबर की शाम से आमरण अनशन पर बैठे हैं। वे हेल्थ सेक्रेटरी एनएस निगम को हटाने समेत 9 मांगों पर अड़े हैं। फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन ने पश्चिम बंगाल के जूनियर डॉक्टरों को समर्थन देने का ऐलान किया है। बुधवार को देश भर में डॉक्टर्स भूख हड़ताल करेंगे। बंगाल सरकार ने कहा है कि सरकार अपने सभी वादे पूरी कर रही है। ममता सरकार ने डॉक्टरों से अनशन खत्म करने की अपील की है।
उधर पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने कहा कि देवी दुर्गा के नाम पर मैं भरोसे के साथ कहता हूं कि डॉक्टरों को न्याय दिलाने के लिए जो भी जरूरी है, वह सब किया जाएगा। उन्होंने डॉक्टरों के साथ एकजुटता जताते हुए कहा कि उनकी समस्याओं का समाधान किया जाएगा। बोस ने कहा, डॉक्टरों के योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। हमें उनकी सुरक्षा और उनके हक की रक्षा करने के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए।




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