
उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में कोतवाली नगर क्षेत्र के सफेदाबाद कस्बे में स्थित प्राइवेट हिंद मेडिकल कॉलेज के हास्टल में एमबीबीएस द्वितीय वर्ष के एक छात्र ने फांसी लगाकर जान दे दी। छात्र का शव छात्रावास में उसके कमरे में फंदे से लटका मिला। वह वाराणसी जिले के एक चिकित्सक का पुत्र था। शुरुआती जांच में पता लगा कि उपस्थिति कम होने के चलते छात्र विकास प्रसाद यादव को आशंका थी कि वह फेल हो जाएगा। मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से भी फांसी लगाए जाने की पुष्टि हुई है।
पुलिस ने बताया कि जिला वाराणसी के बड़ागांव थाना क्षेत्र के सिधालपुर गांव का निवासी विकास प्रसाद यादव (26) हिंद मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस द्वितीय वर्ष का छात्र था। वह कॉलेज परिसर में ही बने छात्रावास के कमरे में अपने साथी एमबीबीएस के छात्र मनीष कुमार के साथ रहता था। पुलिस के अनुसार, घटना से पहले की रात मनीष खाना खाने मेस गया था। कुछ देर बाद वह लौटा तो कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था। बार बार पुकारने के बाद भी दरवाजा नहीं खुला तो वहां के कर्मचारियों और अन्य छात्रों ने दरवाजा तोड़ दिया। कमरे में चादर के फंदे के सहारे पंखे से विकास का शव लटक रहा था।
मौके पर पहुंची पुलिस ने छानबीन की। कमरे में कोई सुसाइड नोट नहीं मिला। सूचना मिलने के बाद 12 अक्टूबर को वाराणसी से यादव के पिता डॉ. ओमप्रकाश यादव व अन्य परिजन आए। छात्रों ने बताया कि कॉलेज में उपस्थिति कम होने से विकास तनाव में था। परिजनों ने किसी पर कोई आरोप नहीं लगाया। शहर कोतवाल अजय कुमार त्रिपाठी ने बताया कि पुलिस आत्महत्या का कारण पता लगाने में जुटी है।
मृतक के पिता अशोक कुमार यादव ने बताया कि विकास अपनी अनुपस्थिति को लेकर बहुत परेशान था। फोन पर हुई बातचीत में उसने कहा था कि कहीं उसे कालेज वाले फेल न कर दें। उसकी स्थिति को देखते हुए उन्होंने अपने बड़े पुत्र चंद्रशेखर यादव को करीब पांच दिन पहले उसके पास भेजा था। बड़े भाई चंद्रशेखर ने विकास से घर चलने को कहा लेकिन उसने मना कर दिया था।




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