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सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक के कक्षा 8 से 10 तक के बोर्ड परीक्षा परिणाम पर लगाई रोक, कहा- छात्रों का गला न घोंटें

कक्षा 8 से 10 तक के विद्यार्थियों की बोर्ड परीक्षाएं आयोजित कराने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक सरकार को फटकार लगाई है। कोर्ट ने अगले आदेश तक कक्षा 8, 9 और 10 की बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम घोषित करने से रोक दिया है। कोर्ट ने कहा कि छात्रों को क्यों परेशान किया जा रहा है? ऐसे शिक्षा मॉडल का पालन कोई और नहीं करता है। गौरतलब है कि कर्नाटक सरकार ने वर्तमान सत्र के कक्षा 5, 8, 9 और 10 के लिए बोर्ड परीक्षा कराने का फरमान जारी किया था। लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद सरकार ने कक्षा 8 से 10 की बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम को घोषित करने से रोक दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “आप राज्य हैं, आपको इस तरह का व्यवहार नहीं करना चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि इसे अहंकार का मुद्दा न बनाएं और यदि आप वास्तव में छात्रों के कल्याण के बारे में चिंतित हैं, तो कृपया अच्छे स्कूल खोलें और उनका गला न घोंटें।” न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी और सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने निर्देश दिया कि यदि किसी जिले में परीक्षा आयोजित नहीं की गई है, तो उसे नहीं लिया जाएगा। इसके बाद कर्नाटक सरकार की तरफ से पेश हुए वकील देवदत्त कामत ने शीर्ष अदालत को सूचित किया कि राज्य सरकार ने राज्य के सात ग्रामीण मंडलों में चालू शैक्षणिक वर्ष में कक्षा 5, 8, 9 और 10 के छात्रों के लिए बोर्ड परीक्षा आयोजित करने का निर्णय वापस ले लिया है। साथ ही यह भी बताया गया कि परीक्षा 24 अन्य जिलों में भी आयोजित की गई थी। इस पर उसने राज्य सरकार से चार सप्ताह के भीतर परीक्षा की वास्तविक जानकारी देते हुए एक हलफनामा दाखिल करने के लिए कहा। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट कर्नाटक उच्च न्यायालय के 22 मार्च के फैसले के खिलाफ दायर एक अपील पर सुनवाई कर रही थी।

इस बारे में हाई कोर्ट की खंडपीठ ने एकल पीठ के छह मार्च के आदेश को पलटते हुए राज्य सरकार को अकादमिक वर्ष 2023-24 के लिए विभिन्न क्लास के लिए बोर्ड परीक्षाएं कराने की अनुमति प्रदान की थी। हाई कोर्ट की एकल पीठ ने कर्नाटक राज्य परीक्षा और मूल्यांकन बोर्ड (KSEB) के माध्यम से विभिन्न कक्षाओं के लिए बोर्ड परीक्षाएं कराने के राज्य सरकार के अक्टूबर 2023 के निर्णय को रद्द कर दिया था.

इस बीच, स्कूल शिक्षा मंत्री बंग मधुरप्पा ने शुक्रवार को कक्षा 5, 8, 9 और 11 का बोर्ड रद्द करने की आधिकारिक घोषणा की  थी। अप्रैल में सुप्रीम कोर्ट ने इन शिक्षा अधिकार अधिनियम के खिलाफ आदेश दिया था। बंग मधुरप्पा ने बताया कि नई योजना के अनुसार, कक्षा 5, 8 और 9 के छात्रों का योगात्मक आकलन-2 (एसए-2) के माध्यम से मूल्यांकन किया जाएगा, जबकि कक्षा 11 के छात्रों का वार्षिक परीक्षा अध्ययन होगा। 

 

Asmita Sarkar

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