
PM-SHRI योजना शुरू होने के दो साल बाद आखिरकार दिल्ली सरकार ने प्रधानमंत्री स्कूल्स फॉर राइजिंग इंडिया (PM-SHRI) योजना में शामिल होने को लेकर अपनी हामी भर दी। दिल्ली ने अंततः इस योजना को अपना लिया है। दिल्ली सरकार के शिक्षा अधिकारियों ने इस योजना को लागू करने के लिए 22 अक्टूबर को शिक्षा मंत्रालय के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर कर दिए।
बता दें कि PM-SHRI योजना के तहत पांच साल में 27,000 करोड़ रुपये से अधिक का बजट रखा गया है। इसमें केंद्र सरकार 60 फीसदी और राज्य सरकारें 40 फीसदी राशि वहन करेंगी। पूर्वोत्तर में केंद्र 90% धन मुहैया कराएगा। इस योजना का उद्देश्य कम से कम 14,500 सरकारी स्कूलों को मिसाल संस्थानों में बदलना है। इसका मकसद राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के क्रियान्वयन को प्रदर्शित करना है।
PM-SHRI समग्र शिक्षा योजना के अंतर्गत आती है, जिसके माध्यम से सरकारी स्कूलों की प्रमुख वित्त पोषण आवश्यकताओं को पूरा किया जाता है। पीएम-श्री के अलावा, इन फंडों में शिक्षकों के वेतन, यूनिफॉर्म और किताबें, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के छात्रों के लिए प्रतिपूर्ति और निजी स्कूलों में ईडब्ल्यूएस को सहायता शामिल है।
दिल्ली सरकार के PM-SHRI योजना लागू करने पर राजी होने और इस सम्बन्ध में केंद्र के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने के बाद शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि दिल्ली के लिए समग्र शिक्षा फंड जल्द ही जारी किया जाएगा। गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने दिल्ली, पंजाब और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों को स्कूल शिक्षा कार्यक्रम, समग्र शिक्षा अभियान (SSA) के तहत फंड देना बंद कर दिया था। यह कदम इसलिए उठाया गया क्योंकि ये राज्य प्रधानमंत्री स्कूल्स फॉर राइजिंग इंडिया (PM-SHRI) योजना में शामिल होने से हिचकिचा रहे थे। केंद्र सरकार का कहना है कि जो राज्य PM-SHRI योजना में शामिल नहीं होंगे, उन्हें SSA के तहत फंड नहीं मिलेगा।
इस योजना में शामिल होने के लिए राज्यों को शिक्षा मंत्रालय के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर करना होता है। इससे पहले सितंबर में, दिल्ली के सचिव (शिक्षा) अशोक कुमार ने केंद्र को पत्र लिखकर PM-SHRI समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने में रुचि व्यक्त की थी। श्री कुमार ने वित्त वर्ष 2023-24 के लिए समग्र शिक्षा फंड की तीसरी और चौथी किस्त और वित्त वर्ष 2024-25 के लिए पहली किस्त जारी करने का भी अनुरोध किया था। इसके तहत ₹330 करोड़ की राशि लंबित है।
बता दें कि दिल्ली से पहले पंजाब भी अगस्त में इस योजना में शामिल हो चुका है। पंजाब द्वारा पीएम-श्री योजना को लागू करने के लिए आगे आने के कुछ दिनों बाद, उसे 2024-25 के लिए समग्र शिक्षा निधि की पहली किस्त का केंद्रीय हिस्सा भी मिला, जिसकी राशि ₹177 करोड़ है। अब दिल्ली भी इसमें शामिल हो गया है।
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि तमिलनाडु और केरल भी जल्द ही समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करेंगे। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने फंड जारी होने में देरी का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा था। तमिलनाडु में दो-भाषा नीति का पालन किया जाता है, जबकि एनईपी में तीन-भाषा नीति के कार्यान्वयन की सिफारिश की गई है, जिसे श्री स्टालिन ने अस्वीकार कर दिया है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने जोर देकर कहा कि तमिलनाडु को राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने के लिए आगे आना चाहिए।
केरल ने पहले एनईपी के राजनीतिक विरोध का हवाला देते हुए पीएम-श्री योजना पर हस्ताक्षर नहीं करने का फैसला किया था। बाद में इसने पीएम-श्री योजना को लागू करने पर सहमति जताई, लेकिन अभी तक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। पश्चिम बंगाल ने अपने स्कूलों के नाम में पीएम-श्री उपसर्ग जोड़ने का विरोध किया है क्योंकि राज्य लागत का 40% वहन करते हैं। सितंबर में राज्य सरकार के अधिकारियों ने कहा था कि पश्चिम बंगाल को लंबित समग्र शिक्षा निधि में करीब ₹1,000 करोड़ का इंतजार है।




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