
सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के 10 अप्रैल 2023 के एक आदेश का हवाला देते हुए स्कूल जाने वाली छात्राओं के लिए मेन्स्ट्रूअल हाईजीन पॉलिसी को मंजूरी दे दी है। स्कूलों में लड़कियों के लिए मेन्स्ट्रूअल हाईजीन को बेहतर बनाने और सुविधा देने के लिए केंद्र सरकार ने ये नई पॉलिसी बनाई है। केंद्र सरकार ने 11 नवंबर को इसकी जानकारी सुप्रीम कोर्ट को दी।
दरअसल 10 अप्रैल 2023 को सुप्रीम कोर्ट में कांग्रेस लीडर और सोशल एक्टिविस्ट जया ठाकुर ने PIL (Public interest Litigation) यानी जनहित याचिका लगाई थी। जिसमें केंद्र और राज्य सरकारो से क्लास 6 से 12 तक की छात्राओं को मुफ्त सैनिटरी पैड उपलब्ध कराने और इसके साथ ही सभी गवर्नमेंट और गवर्नमेंट की मदद से चलने वाले प्राइवेट स्कूलों में लड़कियों के लिए अलग टॉयलेट की सुविधा की अपील की गई थी। इसी अपील को देखते हुए ये पॉलिसी बनाई गई है। ये ऑर्डर स्कूल में छात्राओं के मेन्स्ट्रूअल हाईजीन को लेकर दिया गया था।
मेन्सट्रूअल हाईजीन के पेंडिंग मामलों को लेकर लगाए एफिडेविट के मुताबिक, स्कूली छात्राओं के बीच मेन्सट्रूअल हाईजीन को लेकर समझ बढ़ाने और इसे लेकर सोच और व्यवहार में बदलाव लाने के लिए सरकार के स्कूली सिस्टम में मेन्सट्रूअल हाईजीन को डेली एक्टिविटी में लाने के लिए ये पॉलिसी लाई गई है। इस पॉलिसी को लाने का मकसद उन रुकावटों को दूर करना है, जो मेन्सट्रूअल साइकिल के दौरान छात्राओं को स्कूल आने से रोकती हैं।
भारत में किशोरियों की स्थिति पर एक सर्वे में पाया गया कि टॉयलेट की कमी के कारण एक चौथाई लड़कियां मेन्सट्रूअल साइकिल के दौरान स्कूल नहीं जाती हैं (वैन ईजक एट अल. रिपोर्ट 2016)। जस्टिस जे बी पारदीवाला और पंकज मिथल की पीठ ने 12 नवंबर को इस अपील पर सुनवाई की ।
इसमें मांग की गई है कि स्कूलों में सर्वे सिस्टम को बेहतर बनाया जाना चाहिए और ये पता लगाना चाहिए कि इसे कैसे बेहतर किया जा सकता है। जिससे पता चल सके कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इसमें क्या सुधार किया जा सकता है ताकि गवर्नमेंट और प्राइवेट स्कूलों में स्टूडेंट्स को मेन्सट्रूअल साइकिल से जुड़ी साफ-सफाई की जानकारी हो और पैड्स जैसे जरूरी सामान मिल सकें।
केंद्र सरकार ने कहा, इस पॉलिसी का उद्देश्य सोशल टैबू को खत्म करना और मेन्सट्रूअल साइकिल को सुरक्षित बनाना है।
UNICEF और WHO ने मेन्सट्रूअल साइकिल को लेकर मेन्सट्रूअल हाईजीन डे पर एक रिपोर्ट जारी की थी, जिसमें स्कूलों में लड़कियों को दी जाने वाले फैसिलिटी को लेकर एक स्टडी शामिल थी।




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