
मध्य प्रदेश के भोपाल स्थित गांधी मेडिकल कॉलेज (GMC) ने अपने परिसर में स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा को लेकर बढ़ते खतरों के मद्देनज़र महिला डॉक्टरों, पैरामेडिकल कर्मचारियों और अन्य कर्मचारियों को सीटी बांटना शुरू किया है। जी हां, कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में एक प्रशिक्षु महिला डॉक्टर के साथ हुई बलात्कार और हत्या की घटना के बाद स्वास्थ्यकर्मियों खासकर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए गांधी मेडिकल कॉलेज ने यह कदम उठाया है।
इस पहल से स्वस्थ्यकर्मी किसी आपात स्थिति या सुरक्षा खतरे के मामले में सीटी बजा सकते हैं, जिससे वे आस-पास के सुरक्षा कर्मियों को सचेत कर सकें और तत्काल उन्हें अपनी मदद के वास्ते बुला सकें। गांधी मेडिकल कॉलेज की डीन डॉ कविता एन सिंह ने बताया कि परिसर में भारी भीड़ के कारण दिन के समय सुरक्षा कोई मुद्दा नहीं है, लेकिन रात में स्थिति अधिक चिंताजनक है।
डॉ कविता एन सिंह कहती हैं, “हर महिला डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ को सुरक्षा गार्ड मुहैया कराना संभव नहीं है। दिन के समय कोई समस्या नहीं होती है क्योंकि परिसर में भीड़ रहती है। रात में महिला कर्मचारियों को परेशानी होती है, इसलिए मैंने सीटी बांटी है, जिसे वे दिन में या रात में जब भी कैंपस में असुरक्षित महसूस करें, बजा सकें। ड्यूटी पर तैनात सुरक्षा गार्ड उनके पास दौड़कर आएंगे और सुनिश्चित करेंगे कि वे सुरक्षित और सकुशल हैं।”
जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (JUDA) ने भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज में सुरक्षा से जुड़ी कई चुनौतियों को उजागर किया है, जिसमें अतिक्रमण और भीड़भाड़ शामिल है। अनधिकृत व्यक्ति अक्सर बिना किसी स्पष्ट उद्देश्य के कैंपस में घूमते रहते हैं, जिससे कर्मचारियों और छात्रों में असुरक्षा की भावना पैदा होती है। GMC कैंपस, जिसमें हमीदिया, सुल्तानिया और कमला नेहरू अस्पताल हैं, हमेशा मरीजों, परिचारकों, आगंतुकों और चिकित्सा कर्मचारियों से भरा रहता है। इसके अतिरिक्त, कैंपस में पूजा स्थलों की उपस्थिति विभिन्न धार्मिक पृष्ठभूमि के लोगों के आने-जाने को और बढ़ा देती है।




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