Edinbox Hindi

एनआईटी राउरकेला ने मनाया संविधान दिवस, जनजातीय गौरव वर्ष का शुभारंभ

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एनआईटी) राउरकेला ने 26 नवंबर को बड़े उत्साह के साथ संविधान दिवस मनाया। यह कार्यक्रम सीनेट हॉल में आयोजित किया गया, जिसमें छात्र, संकाय सदस्य, कर्मचारी, और आरईसी कैंपस स्कूल के बच्चे शामिल हुए। यह आयोजन 26 नवंबर 1949 को भारत के संविधान को अंगीकृत किए जाने के 75वें वर्ष के आरंभ का प्रतीक है और संविधान के निर्माताओं के योगदान को श्रद्धांजलि अर्पित करता है। इसके साथ ही, इस कार्यक्रम ने 15 नवंबर से 26 नवंबर 2024 तक चलने वाले जनजातीय गौरव दिवस के राष्ट्रीय उत्सव के समापन का भी प्रतीकात्मक आयोजन किया।

कार्यक्रम की शुरुआत में माननीय अतिथियों ने भगवान बिरसा मुंडा और अन्य जनजातीय नायकों को पुष्पांजलि अर्पित की। एनआईटी राउरकेला के निदेशक प्रोफेसर के. उमामहेश्वर राव ने आधिकारिक रूप से जनजातीय गौरव वर्ष का उद्घाटन किया, जो 15 नवंबर 2024 से 15 नवंबर 2025 तक चलेगा। इसके बाद कार्यक्रम में प्रो. नेहा सोमन द्वारा संविधान की प्रस्तावना का पाठ किया गया और छात्रों द्वारा एक मनमोहक संथाली लोकगीत प्रस्तुत किया गया।

प्रो. बिकास रंजन मिश्रा ने उपस्थित जनों का स्वागत किया, जिसके बाद प्रो. रामकृष्ण बिस्वाल (दोनों कार्यक्रमों के नोडल अधिकारी) ने जनजातीय गौरव दिवस और संविधान दिवस 2024 के तहत आयोजित गतिविधियों का विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा, “एनआईटी राउरकेला ने आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों को सम्मानित करने और भारत के स्वतंत्रता संग्राम में उनके अमूल्य योगदान को स्वीकार करने के लिए कई कार्यक्रम आयोजित किए। हमने छात्रों के लिए ऐसी गतिविधियाँ भी आयोजित कीं, जो हमारे संविधान में निहित मूल्यों को विकसित करने में सहायक हों।”उन्होंने मानविकी और सामाजिक विज्ञान विभाग, उन्नत भारत टीम एनआईटी राउरकेला, इंस्टीट्यूट काउंसलिंग सर्विसेज और सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स कैंपस क्लब के सहयोग से आयोजित कार्यक्रमों के बारें में बताया। इनमें एनआईटीआर के छात्रों और आरईसी कैंपस के बच्चों के लिए निबंध और प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताएं शामिल थीं।

संस्थान ने आदिवासी इतिहास, शिक्षा, अधिकार, विकास, स्वास्थ्य सेवा और आजीविका से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर आधारित आठ व्याख्यानों की श्रृंखला भी आयोजित की। इसके अलावा, आदिवासी जीवनशैली के अनुरूप सतत् विकास पर जोर देने के लिए एक सामूहिक स्वच्छता अभियान भी आयोजित किया गया, जिसका नेतृत्व प्रोफेसर अनिल सिंह और प्रोफेसर प्रतीक खत्री ने किया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, प्रोफेसर के. उमामहेश्वर राव ने वेबिनार श्रृंखला के वक्ताओं में से प्रोफेसर के. के. राव, प्रोफेसर संतोस दास और प्रोफेसर राम चंद्र प्रधान सहित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित किया। अपने संबोधन में उन्होंने भारत रत्न डॉ. बी.आर. अंबेडकर की विरासत का स्मरण करते हुए कहा, “यह अवसर हमें संविधान के मूल्यों पर चिंतन करने और अपनी संप्रभुता, एकता, राष्ट्रीय हित, और पर्यावरणीय अखंडता को संरक्षित करने का मौका देता है। भारत का संविधान हमें कई अधिकार देता हैं, लेकिन इन अधिकारों की सुरक्षा के लिए हमें भगवान बिरसा मुंडा से प्रेरणा लेनी चाहिए, जिन्होंने ब्रिटिश उपनिवेशवाद और आदिवासी भूमि के शोषण के खिलाफ संघर्ष किया। उनके प्रयासों ने आदिवासी भूमि अधिकारों को मान्यता देने के लिए भविष्य में सुधारों की नींव रखी। आज हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हम शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, रोजगार, और प्रशासन में उनकी संवैधानिक अधिकारों को बनाए रखें और समतामूलक अवसर प्रदान करें।”

प्रो. एस.के. पटेल (रजिस्ट्रार इन चार्ज, एनआईटी राउरकेला) ने कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में भाग लिया और बताया कि ऐसे आयोजन हमें जनजातीय नायकों की देशभक्ति को याद करने का अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि जनजातीय क्षेत्र में स्थित एनआईटी राउरकेला को उनकी कहानियों को बढ़ावा देने का सुनहरा अवसर मिला है और हमें इस तरह के कई और कार्यक्रम करने चाहिए।

मानविकी और सामाजिक विज्ञान विभाग के प्रमुख, प्रो. नारायण सेठी ने सभा को संबोधित किया और इन महत्वपूर्ण आयोजनों को सफलतापूर्वक आयोजित करने के लिए प्रो. आर.के. बिस्वाल और उनकी टीम के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने समग्र जनजातीय सहभागिता के महत्व को रेखांकित करते हुए जाति और लिंग आधारित भेदभाव को समाप्त करने और भारतीय संविधान का सम्मान करने और इसकी रक्षा करने की आवश्यकता पर बल दिया।

कार्यक्रम का समापन राष्ट्रीय गान के साथ हुआ और वर्ष भर के लिए जनजातीय गौरव वर्ष को मनाने हेतु प्रस्तावित गतिविधियों की घोषणा की गई। धन्यवाद ज्ञापन प्रोफेसर आर्या प्रियदर्शिनी ने दिया।

Asmita Sarkar

Add comment

Recent posts

Most popular

Most discussed