
दिल्ली के निजी स्कूलों में नर्सरी, केजी और पहली कक्षा में दाखिले के लिए प्रवेश प्रक्रिया जारी है। आवेदन प्रक्रिया के लिए स्कूलों ने जो मानक शामिल किए हैं, वह कुछ अभिभावकों के लिए राहत भरे हैं तो कई को उनसे परेशानी हो रही है। खासकर एल्युमनी (पूर्व छात्र) व सिबलिंग (भाई-बहन) मानकों के अंक से। इसने कई बच्चों की दाखिले से दूरी बढ़ा दी है।
दाखिले की रेस में एल्युमनी (पूर्व छात्र) व सिबलिंग (भाई-बहन) मानकों से ऐसे अभिभावकों को परेशानी है जो ना उस स्कूल में पढ़े हैं और न ही उनका कोई और बच्चा उस स्कूल में पढ़ता और उनके पास एकल बालक है। इन दो मानकों को स्कूलों ने 10-20 तक अंक दिए हैं। अभिभावकों की शिकायत है कि इन मानकों से स्कूल परिवारवाद को बढ़ावा दे रहे हैं। इससे उनका किसी नामी स्कूल में पढ़ने का सपना भी सपना बनता दिख रहा है।
गौरतलब है कि निजी स्कूलों में 28 नवंबर से दाखिला प्रक्रिया जारी है जो 20 दिसंबर तक जारी रहेगी। आवेदन प्रक्रिया के लिए स्कूलों ने जो मानक शामिल किए हैं, वह कुछ अभिभावकों के लिए राहत भरे हैं तो कई अभिभावकों को उनसे परेशानी हो रही है। एल्युमिनी (माता-पिता पूर्व छात्र), सिबलिंग (भाई-बहन का पढऩा) मानक के कारण अभिभावकों के लिए अपने पहले बच्चे का दाखिला कराना मुश्किल हो रहा है क्योंकि उन्हें सिर्फ पड़ोस के अंक ही मिल रहे हैं।
पड़ोस (नेबरहुड) के बाद एल्युमिनी (माता-पिता पूर्व छात्र), सिबलिंग (भाई-बहन का पढऩा) के ही मानक हैं जिन्हें सर्वाधिक अंक दिए गए हैं।




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