Edinbox Hindi

शह और मात के खेल की नई सनसनी डी गुकेश, 18 साल की उम्र में बने विश्व चैंपियन

शतरंज के मौजूदा विश्व चैंपियन डी गुकेश ने महज सात साल की उम्र में चेन्नई में कार्लसन के हाथों विश्वनाथन आनंद की हार देखकर ही शतरंज की दुनिया का सरताज बनने का लक्ष्य बना लिया था। कॉमिक्स और यू-ट्यूब पर वीडियो देखने के शौकीन डी गुकेश ने सिर्फ 18 वर्ष की उम्र में विश्व चैंपियन बनकर पूरी दुनिया को बता दिया है कि शह और मात के खेल की इस सनसनी को रोकना अब आसान नहीं। 
 
भारतीय ग्रैंडमास्टर डी गुकेश ने सिंगापुर में वर्ल्ड चेस चैंपियनशिप का खिताब जीतकर ऐतिहासिक कामयाबी हासिल की है। महज 18 साल की उम्र में विश्व चैंपियन बनकर उन्होंने पूरे देश को गर्व करने का मौका दिया है। उनका कारनामा इस मायने में भी अहम है कि उनसे पहले भारत के लिए केवल विश्वनाथन आनंद यह टाइटल जीत सके थे।

गुकेश ने यह ताज 14 कड़े गेम के बाद हासिल किया। 13वें गेम तक उनके और चीन के डिफेंडिंग चैंपियन डिंग लिरेन के बीच मुकाबला बराबरी पर था। 14वें गेम में भी ऐसी सिचुएशन बन गई थी, जहां लग रहा था कि यह बाजी भी ड्रॉ रहेगी और दोनों खिलाड़ियों को फिर से भिड़ना पड़ेगा। लेकिन, लिरेन की एक गलती उन पर भारी पड़ी और गुकेश ने दिखाया कि उन्हें प्रतिद्वंद्वी की गलत चालों का इस्तेमाल अपने हक में करना आता है।

गुकेश की उपलब्धि को किस तरह आंका जाए, शायद यह सवाल बहुतों को मथ रहा होगा। क्रिकेट को धर्म की तरह मानने वाले इस देश में दूसरे खेलों के साथ अक्सर यह संकट आता है। तो गुकेश ने जो मकाम हासिल किया है, उसकी चमक किसी विश्व कप या ओलिंपिक्स के किसी गोल्ड मेडल से कम नहीं, बल्कि उससे अधिक ही आंकी जाएगी। पहली बार इतनी कम उम्र के किसी खिलाड़ी ने शतरंज पर इस तरह की महारथ हासिल की है। यह जादू इससे पहले गैरी कैस्परोव ने किया था, लेकिन तब वह 22 साल के थे।

भारतीय शतरंज की सबसे बड़ी उम्मीद बनकर उभरे हैं गुकेश। और सबसे बड़ी बात है कि अपने छोटे-से करियर में वह समय-समय पर अपनी प्रतिभा की झलक दिखलाते रहे हैं। जब महज 17 दिनों से वह दुनिया के सबसे कम उम्र के ग्रैंडमास्टर बनने से चूक गए थे, तभी से इस दिन का इंतजार शुरू हो गया था कि कब वह विश्व शतरंज चैंपियनशिप का खिताब अपने नाम करेंगे

हर महान उपलब्धि मेहनत और जुनून मांगती है। गुकेश को करीब से देखने वाले जानते हैं कि उन्होंने चेस बोर्ड को इससे कहीं बढ़कर दिया। उनके तैयारी करने का ढंग हो या एकाग्रता, तारीफ उनके विरोधी खिलाड़ी भी करते रहे हैं। तभी तो खिताबी चूक के बाद भी लिरेन अपनी हार से ज्यादा गुकेश की जीत पर बात करने से खुद को रोक नहीं पाए।

 

Asmita Sarkar

Add comment

Recent posts

Most popular

Most discussed