
बिहार के एक जनपद में प्राइवेट स्कूलों में उर्दू पढ़ाने के लिए आदेश जारी किया गया है। किशनगंज जनपद के जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) नासिर हुसैन ने प्राइवेट स्कूलों में उर्दू पढ़ाने के लिए आदेश जारी किया है। डीईओ ने सभी निजी स्कूलों को एक पत्र जारी कर उन्हें “अल्पसंख्यक बहुल जिले” में उर्दू पढ़ाने के लिए कहा है। डीईओ हुसैन ने आगे कहा कि जिले में चलने वाले प्राइवेट स्कूलों में स्टूडेंट्स को उर्दू की पढ़ाई के लिए जरूरी इंतेजामात सुनिश्चित की जाए। आदेश के मुताबिक, उन्हें बिहार एजुकेशन प्रोजेक्ट ऑफिस में इसको लेकर रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा है।
12 दिसंबर 2024 को जारी किए गए आदेश में कहा गया है, “किशनगंज जिले के सभी सीबीएसई बोर्ड से मान्यता प्राप्त प्राइवेट स्कूल्स से अनुरोध है कि वे इच्छुक विद्यार्थियों को उर्दू की पढ़ाई के लिए आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित करें तथा संबंधित अनुपालन रिपोर्ट बिहार शिक्षा परियोजना कार्यालय, किशनगंज को उपलब्ध कराएं।” उनके इस फैसले की काफी लोग तारीफ कर रहे हैं।
यह फैसला डिस्ट्रिक्ट डेवलपमेंट कॉर्डिनेशन एंड मोनिट्रिंग कमेटी की अक्टूबर, 2024 में हुई बैठक के बाद आया है, जिसमें कांग्रेस सांसद जावेद आजाद और कांग्रेस विधायक इजहारुल हुसैन ने कहा था कि जिले के निजी स्कूलों में उर्दू नहीं पढ़ाई जा रही है। इसके बाद ही यह फैसला लिया गया है। वहीं बिहार एजुकेसन मिनिस्टर सुनील कुमार ने कहा था,”वे जो चाहें कह सकते हैं; यह उनका अधिकार है, लेकिन आयोग इसकी जांच करेगा और सही फैसला लेगा।”
हालांकि डीईओ के इस आदेश के बाद बीजेपी भड़क गई है और बड़ी डिमांड कर दी है। बीजेपी के जिलाध्यक्ष ने कहा है कि अगर स्कूल में उर्दू पढ़ाने के लिए दबाव बनाया गया, तो वो लोग स्कूल की प्रार्थना में गांयत्री मंत्र पाठ की मांग उठाएंगे। रिपोर्ट के मुताबिक, बाल मंदिर विद्यालय के सचिव ने कहा है कि यह संभव नहीं है कि स्कूल में दो-चार बच्चों के लिए उर्दू पढ़ाने की अलग से व्यवस्था की जाए।




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