
उच्चतम न्यायालय यानी सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सिविल सेवा अभ्यर्थियों की याचिका पर सहायता के लिए एक एमिकस क्यूरी यानी न्यायमित्र नियुक्त किया है, जिसमें यूपीएससी को सिविल सेवा (प्रारंभिक) परीक्षा में बैठने वाले अभ्यर्थियों की उत्तर कुंजी, कट-ऑफ अंक और अंकों का खुलासा करने का निर्देश देने की मांग की गई है।
यूपीएससी ने 2023 की सिविल सेवा (प्रारंभिक) परीक्षा सहित लगभग सभी पिछली परीक्षाओं में यह सुनिश्चित किया है कि अंक, कट ऑफ अंक और उत्तर कुंजी का खुलासा परीक्षा की पूरी प्रक्रिया समाप्त होने के बाद ही किया जाएगा।
न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने मामले में सहायता के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता जयदीप गुप्ता को न्यायमित्र नियुक्त किया तथा याचिकाकर्ताओं से कहा कि वे याचिका की एक प्रति उन्हें सौंपें।
15 जनवरी के अपने आदेश में न्यायालय ने कहा, “हमने न्यायालय में उपस्थित वरिष्ठ अधिवक्ता जयदीप गुप्ता से इस मामले में न्यायमित्र के रूप में न्यायालय की सहायता करने का अनुरोध किया है, जिसे श्री गुप्ता ने विनम्रतापूर्वक स्वीकार कर लिया है।”
सुनवाई के दौरान 17 यूपीएससी अभ्यर्थियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि विवरण का खुलासा न करने के यूपीएससी के आचरण में पारदर्शिता का अभाव है।
उन्होंने कहा कि यदि अभ्यर्थियों/आकांक्षियों की उत्तर कुंजी, कट-ऑफ अंक और अंकों का खुलासा कर दिया जाए, तो वे तर्कसंगत और प्रमाणिक आधार पर गलत और अशुद्ध मूल्यांकन के खिलाफ “प्रभावी” उपचार पाने के हकदार होंगे।
शीर्ष अदालत ने केंद्र और यूपीएससी को एक अतिरिक्त हलफनामा दायर करने को कहा, जिसमें यह बताया जाए कि यदि रिट याचिका में किए गए अनुरोध को आवश्यक आंकड़े उपलब्ध होने के साथ स्वीकार कर लिया जाता है, तो संस्थान को किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 4 फरवरी को तय की।
न्यायालय ने पिछले वर्ष फरवरी में अधिवक्ता राजीव कुमार दुबे के माध्यम से दायर याचिका पर विचार करने पर सहमति व्यक्त की थी।
याचिका में लाखों अभ्यर्थियों/आकांक्षियों के हितों की रक्षा के लिए “किसी भी बड़ी गलती से” उत्तर पुस्तिकाओं और अन्य विवरणों को सार्वजनिक करने का तर्क दिया गया।
याचिका में दावा किया गया है कि अतीत में कई मुकदमों के बावजूद संघ लोक सेवा आयोग यह बताने में विफल रहा है कि उसे पारदर्शिता के प्रति इतनी “एलर्जी” क्यों है।
इसमें दावा किया गया है कि उत्तर कुंजी, कट-ऑफ अंक और अंकों का “शीघ्र और समय पर खुलासा” लगभग हर राज्य लोक सेवा आयोगों के साथ-साथ उच्च न्यायालयों और कई अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों जैसे आईआईटी, आईआईएम और कई अन्य द्वारा अपनाया जाने वाला सामान्य अभ्यास है।
अभ्यर्थियों ने कहा कि उनकी याचिका छात्रों की “गंभीर चिंताओं” तथा यूपीएससी की ओर से पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी को उजागर करती है… तथा महत्वपूर्ण जानकारी को छिपाने में उसके आचरण की जांच करने की मांग करती है।




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