
महाकुंभ में वायरल हुए अभय सिंह इन दिनों सुर्खियों में हैं। IIT से पढ़ाई करने और कनाडा में 36 लाख रुपए के पैकेज पर जॉब करने के बाद उन्होंने कम उम्र में अध्यात्म का रास्ता चुना। हालांकि वे अकेले IITian नहीं हैं, जिन्होंने IIT से पढ़ने के बाद संन्यासी जीवन अपना लिया। हमारे देश में IIT से पढ़कर संन्यास लेने वाले सिर्फ अभय सिंह ही नहीं बल्कि कई अन्य लोग भी हैं। IIT से इंजीनियरिंग की डिग्री लेने के बाद अध्यात्म के मार्ग पर उतरे ऐसे ही कुछ लोगों का जिक्र :
अभय सिंह
पहला नाम अभय सिंह खुद हैं। जिन्होंने IIT बॉम्बे से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और बाद में बाबा बन गए। फिलहाल महाकुंभ में वे आकर्षण के केंद्र में हैं। इन्हें पूरे देश में पहचान मिली है।
गौरांग दास
दूसरा नाम है, गौरांग दास प्रभु का, जो इस वक्त इस्कॉन से जुड़े हुए हैं। इस्कॉन में वे शासी निकाय आयुक्त के रूप में कार्य करते हैं। गौरांग दास प्रभु जी भी IIT Bombay के पास आउट हैं। उन्होंने IIT Bombay से B.tech की डिग्री हासिल की है। नौकरी करने के कुछ समय बाद उन्होंने इसे छोड़ दी और इस्कॉन के साथ जुड़ गए। उन्हें देश के प्रतिष्ठित मोटिवेशनल स्पीकरों में शुमार किया जाता है।
स्वामी मुकुन्दानन्द
तीसरा नाम है, स्वामी मुकुन्दानन्द जी का, जो एक प्रसिद्ध भक्ति योग संत हैं। स्वामी मुकुन्दानन्द जी आध्यात्मिक एवं योग शिक्षक और जगदगुरु श्री कृपालु जी महाराज के वरिष्ठ शिष्य हैं। वे “जे के योग” नामक योग प्रणाली के संस्थापक भी हैं। स्वामीजी ने IIT Delhi से इंजीनियरिंग और IIM से मैनेजमेंट की डिग्री प्राप्त की है। उन्होंने कॉरपोरेट की नौकरी भी की। इसके बावजूद वे एक दिन अचानक अपनी आत्मा की आवाज सुनकर सन्यासी बन गए।
मधु पंडित दास
अगला नाम मधु पंडित दास जी का है। जिन्होंने IIT बॉम्बे से अपनी पढ़ाई पूरी की है। फिलहाल वे इस्कॉन बेंगलुरु के अध्यक्ष हैं।
खुर्शेद बाटलीवाला
खुर्शेद बाटलीवाला भी इस लिस्ट में शामिल हैं। जिन्होंने IIT Bombay से अपनी इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की है। इस वक्त वे Art Of Living नामक संस्थान से जुड़े हुए हैं।
महान MJ
महान MJ भी एक ऐसे संत हैं जिन्होंने IIT कानपुर से मैथ्स में डिग्री हासिल की है। शुरू में उन्होंने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग को अपने करियर के लिए चुना था। लेकिन बाद में उन्होंने मैथ्स ले लिया। महान MJ वर्तमान में मुंबई में टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च में गणित के प्रोफेसर हैं। महान MJ का नाम स्वामी विद्यानाथनंद भी है। 2008 में इस दुनियावी दुनिया से अलग रामकृष्ण मठ के साथ जुड़ गए। वे अपने आध्यात्म से लोगों के जीवन में जीवन की गहराई के बारे में बताते हैं।
आचार्य प्रशांत
आचार्य प्रशांत भी एक ऐसा नाम है जिन्होंने IIT Delhi से टेक्सटाइल इंजीनियरिंग और IIM अहमदाबाद से मैनेजमेंट की पढ़ाई की है। इसके अलावा उन्होंने कुछ समय के लिए भारतीय सिविल सेवा के लिए भी काम किया है। फिलहाल वे अद्वैत फाउंडेशन नामक एक गैर-लाभकारी संगठन के संस्थापक हैं। आचार्य प्रशांत का नाम प्रशांत त्रिपाठी भी है। आज आचार्य प्रशांत अपने प्रवचनों और सैकड़ों किताबों के माध्यम से दुनिया को जागृत कर रहे हैं।
राधेश्याम दास
राधेश्याम दास IIT बॉम्बे के पास आउट है। वे IIT मुंबई के टॉपर भी रह चुके हैं। इसके अलावा वे CECRI में सीनियर रिसर्च फेलो के रूप में तथा थर्मैक्स और मैथर एंड प्लैट कंपनियों में मैकेनिकल इंजीनियर के रूप में काम किया है। बाद में उन्होंने ब्रह्मचारी भिक्षु, युवा प्रशिक्षक और संरक्षक तथा कॉर्पोरेट सलाहकार की भूमिका निभाई। इस वक्त वे इस्कॉन पुणे के अध्यक्ष हैं।
रसनाथ दास
इस लिस्ट में रसनाथ दास जी का नाम भी शामिल है। जिन्होंने IIT बॉम्बे से बैचलर की डिग्री और कार्नेल यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। बाद में उन्होंने संन्यासी जीवन अपना लिया। इस वक्त वे वैष्णव संप्रदाय से जुड़े हुए हैं। उन्होंने अपबिल्ड नाम की एक संस्था खोली है जो लोगों में आंतरिक नेतृत्व क्षमता को आध्यात्म के मार्ग से निखारते हैं।
संकेत पारेख
संकेत पारेख भी एक ऐसा नाम है जो IIT Bombay से केमिकल इंजीनियरिंग से बैचलर और अमेरिका में काम करने के बाद अध्यात्म की ओर बढ़ गए। अमेरिका में अच्छी तनख्वाह वाली नौकरी छोड़ने के बाद वे एक जैन मुनि बन गए। परिवार ने बहुत समझाया लेकिन वे नहीं माने। संकेत पारिख ने दो साल तक आचार्य युग भूषण सुरी के नेतृत्व में साधना की और अब वे पूरी तरह से जैन मुनि हैं.
अविरल जैन
अविरल जैन ने IIT BHU से कंप्यूटर साइंस से बैचलर की डिग्री ली है। अमेरिका के वालमार्ट कंपनी में वे करोड़ों की नौकरी कर रहे थे। 2019 में अचानक उन्होंने नौकरी छोड़ दी और जैन मुनि बन गए। फिलहाल वे जैन भिक्षु के रूप में अपना जीवन व्यतीत कर रहे हैं।
संदीप कुमार भट्ट
संदीप कुमार भट्ट ने आईआईटी दिल्ली से इंजीनियरिंग की है। 2002 में वह अपने बैच के गोल्ड मेडलिस्ट रहे थे। एमटेक के बाद इन्होंने लाखों रुपये की नौकरी की। फिर अचानक एक दिन सिर्फ 28 साल की उम्र में उन्होंने संन्यास की राह पकड़ ली। संन्यासी बनने के बाद उन्होंने अपना नाम स्वामी सुंदर गोपालदास रख लिया।




Add comment