
केंद्र सरकार ने सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2025 के लिए आवेदन प्रक्रिया में बदलाव किया है। अब उम्मीदवारों को आवेदन करते समय ही अपनी आयु और आरक्षण संबंधी दावों के समर्थन में दस्तावेज प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। पहले यह दस्तावेज केवल प्रारंभिक परीक्षा पास करने के बाद जमा करने की आवश्यकता होती थी।
यह निर्णय पूर्व आईएएस प्रोबेशनर पूजा खेडकर के मामले के बाद लिया गया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने ओबीसी और विकलांगता कोटा का गलत तरीके से लाभ उठाकर सिविल सेवा में चयन प्राप्त किया। हालांकि, उन्होंने इन आरोपों का खंडन किया है।
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) हर साल तीन चरणों में सिविल सेवा परीक्षा आयोजित करता है: प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार। यह परीक्षा भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS), भारतीय विदेश सेवा (IFS), और भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के अधिकारियों का चयन करने के लिए होती है।
22 जनवरी को जारी सिविल सेवा परीक्षा नियम-2025 के तहत, आवेदन करते समय उम्मीदवारों को निम्नलिखित जानकारी और दस्तावेज जमा करने होंगे: जन्म तिथि का प्रमाण, श्रेणी (जैसे एससी, एसटी, ओबीसी, ईडब्ल्यूएस, पीडब्ल्यूबीडी, या भूतपूर्व सैनिक), शैक्षिक योग्यता एवं सेवा वरीयता का दस्तावेज। जो उम्मीदवार इन दस्तावेजों को समय पर जमा करने में विफल रहेंगे, उनकी उम्मीदवारी रद्द कर दी जाएगी।
यूपीएससी ने घोषणा की है कि सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2025, 25 मई को आयोजित होगी। इस बार कुल 979 रिक्तियां भरी जाएंगी, जिसमें बेंचमार्क विकलांगता श्रेणी के लिए 38 रिक्तियां आरक्षित हैं।
सरकार ने अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग और विकलांगता श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए आरक्षण का प्रावधान किया है। आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह से ऑनलाइन होगी। इच्छुक उम्मीदवार upsconline.gov.in. पर जाकर 11 फरवरी, 2025 को शाम 6 बजे तक आवेदन कर सकते हैं।
सरकार लैंगिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए महिला उम्मीदवारों को आवेदन करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। नोटिस में कहा गया है कि एक संतुलित और समावेशी कार्यबल तैयार करना सरकार का उद्देश्य है।




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