
सरकारी स्कूलों में बच्चों के पढ़ने और बुनियादी अंकगणित सीखने के स्तर में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। अब सरकारी स्कूलों ने कई मामलों में निजी स्कूलों को भी पीछे छोड़ दिया है। यह प्रगति सरकारी स्कूलों में नामांकित बच्चों की सीखने की क्षमता में वृद्धि का परिणाम है। तीसरी कक्षा के बच्चों का पढ़ने का स्तर बढ़कर 27.1% तक पहुंच गया है।
मंगलवार को जारी वार्षिक शिक्षा स्थिति रिपोर्ट (असर) 2024 के अनुसार, तीसरी कक्षा के बच्चों के पढ़ने के स्तर में वर्ष 2022 की तुलना में काफी सुधार हुआ है। हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, केरल, हरियाणा, ओडिशा और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में यह सुधार 10% से अधिक रहा। खास बात यह है कि यह सुधार निजी स्कूलों के मुकाबले सरकारी स्कूलों में अधिक दर्ज किया गया है।
रिपोर्ट बताती है कि चौथी कक्षा के बच्चों के पढ़ने के स्तर में भी सुधार हुआ है। 2018 में, चौथी कक्षा के केवल 50.5% बच्चे दूसरी कक्षा के स्तर का पाठ पढ़ सकते थे। यह आंकड़ा 2022 में घटकर 42.8% हो गया था, लेकिन 2024 में यह बढ़कर 48.8% हो गया है।
असर एक राष्ट्रव्यापी ग्रामीण सर्वेक्षण है, जिसमें भारत के 605 ग्रामीण जिलों के 17,997 गांवों से 6,49,491 बच्चों को शामिल किया गया। यह अध्ययन भारत के शैक्षिक परिदृश्य में ग्रामीण इलाकों के बच्चों की शिक्षा स्तर पर गहरी नजर डालता है।
रिपोर्ट से यह भी सामने आया कि 14-16 आयु वर्ग के 90% बच्चों के घर में स्मार्टफोन है और 80% बच्चे इनका इस्तेमाल करना जानते हैं। इसमें 85.5% लड़कों की तुलना में 79.4% बेटियां स्मार्टफोन का इस्तेमाल कर पाती हैं। लेकिन केवल 36.2% लड़कों और 26.9% बेटियों के पास अपना स्मार्टफोन है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि अभिभावक बेटियों की तुलना में बेटों को स्मार्टफोन देने में प्राथमिकता देते हैं।हालांकि, 82.2% बच्चे स्मार्टफोन का उपयोग शैक्षिक गतिविधियों के लिए करते हैं, जो डिजिटल शिक्षा के प्रति बढ़ती रुचि को दर्शाता है।




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