
महाराष्ट्र सरकार के मंत्री नितेश राणे ने राज्य के शिक्षा मंत्री दादा भूसे को पत्र लिखकर 10वीं और 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाओं के दौरान छात्राओं के बुर्का पहनने पर रोक लगाने की मांग की है। उनका कहना है कि इससे नकल की घटनाएं बढ़ सकती हैं और परीक्षा की निष्पक्षता पर असर पड़ सकता है।
राणे ने पत्र में लिखा, “हमारी सरकार तुष्टिकरण की राजनीति को स्वीकार नहीं करेगी। जो नियम हिंदू छात्रों पर लागू होते हैं, वही मुसलमान छात्रों पर भी लागू होने चाहिए। जो लोग बुर्का या हिजाब पहनना चाहते हैं, वे इसे घर पर पहन सकते हैं, लेकिन परीक्षा केंद्रों में सभी को समान नियमों का पालन करना चाहिए।”
उन्होंने दावा किया कि पहले भी बुर्का पहनकर नकल करने की घटनाएं हो चुकी हैं और महाराष्ट्र में इस तरह की गड़बड़ियां नहीं होनी चाहिए। राणे ने सुझाव दिया कि परीक्षा केंद्रों पर बुर्का पहनने वाली छात्राओं की जांच के लिए महिला पुलिस या महिला कर्मचारियों की तैनाती की जाए, ताकि परीक्षा पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से आयोजित हो सके।
राणे ने यह भी कहा कि परीक्षा हॉल में बुर्का पहनने से इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों या अन्य माध्यमों से नकल करना आसान हो सकता है, जिससे सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ सकती हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर इस मुद्दे पर ध्यान नहीं दिया गया, तो इससे सामाजिक और कानून-व्यवस्था की समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
कंकावली के विधायक राणे ने इस पत्र के जरिए अपनी मांग स्पष्ट की, लेकिन शिक्षा विभाग की ओर से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। महाराष्ट्र में हाईस्कूल की परीक्षाएं 21 फरवरी से और 12वीं की परीक्षाएं 11 फरवरी से शुरू होनी हैं।




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