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शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधानने साधा विपक्ष पर निशाना, यूजीसी नियमों की गलत व्याख्या का लगाया आरोप

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने यूजीसी नियमों के मसौदे की आलोचना करने पर कांग्रेस और विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाते हुए कहा कि वे प्रगतिशील शैक्षिक सुधारों को काल्पनिक खतरों के रूप में प्रस्तुत कर पुराने राजनीतिक आख्यानों को बनाए रखना चाहते हैं।

क्यों बढ़ा विवाद?
प्रधान की यह प्रतिक्रिया कांग्रेस नेता राहुल गांधी के उस बयान के बाद आई, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि यूजीसी के नए मसौदा विनियम विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में शिक्षकों व शैक्षणिक कर्मचारियों की नियुक्ति की प्रक्रिया को बदलकर “एक इतिहास, एक परंपरा, एक भाषा” थोपने का प्रयास कर रहे हैं।

धर्मेंद्र प्रधान ने कांग्रेस के इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यूजीसी के नए नियम संस्थानों की स्वायत्तता और भाषाई विविधता को बनाए रखते हैं, न कि उसे बाधित करते हैं। उन्होंने कहा कि “यह दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक है कि विपक्षी नेता शैक्षणिक सुधारों को गलत तरीके से प्रस्तुत कर रहे हैं।”

प्रधान का राहुल गांधी पर पलटवार
प्रधान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए लिखा,
“यूजीसी के मसौदा विनियमों का उद्देश्य शैक्षिक संस्थानों के क्षितिज को व्यापक बनाना है, न कि उन्हें सीमित करना। वे अधिक आवाज़ों को शामिल करना चाहते हैं, उन्हें चुप नहीं कराना चाहते।”

प्रधान ने आगे कहा कि कुछ लोग केवल विरोध करने के लिए विरोध कर रहे हैं, जो एक राजनीतिक दिखावा हो सकता है, लेकिन यह तुच्छ राजनीति से ज्यादा कुछ नहीं है। उन्होंने राहुल गांधी को संबोधित करते हुए लिखा,
“मैं विनम्रतापूर्वक सुझाव दूंगा कि श्री @RahulGandhi और संविधान के स्वयंभू चैंपियन अपने राजनीतिक बयान देने से पहले मसौदा विनियमों को पढ़ने का समय निकालें।”

विपक्षी राज्यों ने जताई आपत्ति
यूजीसी के मसौदा नियमों के विरोध में कर्नाटक, तेलंगाना, केरल, तमिलनाडु, हिमाचल प्रदेश और झारखंड के मंत्रियों ने 15-सूत्रीय प्रस्ताव पारित कर यूजीसी से नियमों को वापस लेने की मांग की है। कांग्रेस ने इन्हें “संविधान विरोधी और कठोर” करार दिया है।

प्रधान का विपक्ष पर कटाक्ष
प्रधान ने कहा कि सरकार भारतीय भाषाओं और इतिहास को मिटाने का प्रयास नहीं कर रही, बल्कि उन्हें और अधिक समृद्ध बना रही है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि सरकार ने ‘भारत पुस्तक योजना’ शुरू की है और नई शिक्षा नीति (NEP) के तहत मातृभाषा में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कई सिफारिशें की हैं। उन्होंने कहा,
“प्रधानमंत्री खुद कहते हैं कि सभी भारतीय भाषाएं राष्ट्रीय भाषाएं हैं, लेकिन विपक्ष को इस मूल तथ्य की समझ नहीं है।”

क्या आगे होगा?
यूजीसी के नए नियमों को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच विवाद बढ़ता जा रहा है। जहां सरकार इसे शैक्षिक सुधार का कदम बता रही है, वहीं कांग्रेस इसे संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ मान रही है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार विपक्ष की मांगों पर क्या रुख अपनाती है।

Asmita Sarkar

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