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क्लैट 2025 परीक्षा परिणाम के खिलाफ दायर याचिकाएं दिल्ली हाईकोर्ट भेजी गईं, अगली सुनवाई 3 मार्च को

उच्चतम न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण आदेश में 2025 क्लैट परीक्षा परिणाम के खिलाफ दायर सभी याचिकाओं को विभिन्न उच्च न्यायालयों से दिल्ली उच्च न्यायालय में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया है। यह निर्णय सीएनएलयू द्वारा दायर स्थानांतरण याचिकाओं पर लिया गया। मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति संजय कुमार, और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ ने फैसला दिया कि सभी याचिकाओं पर 3 मार्च 2025 को दिल्ली उच्च न्यायालय की खंडपीठ द्वारा सुनवाई की जाएगी।

आदेश का विवरण:
पीठ ने आदेश में कहा, “सामान्य विधि प्रवेश परीक्षा, पीजी और यूजी से संबंधित सभी मामलों को दिल्ली उच्च न्यायालय की खंडपीठ को हस्तांतरित कर दिया जाएगा, जहां लेटर पेटेंट अपील लंबित है।” इस आदेश के तहत, सभी लंबित मामलों के अभिलेख को सात दिनों के भीतर दिल्ली उच्च न्यायालय में स्थानांतरित किया जाएगा।

क्या है मामला?
क्लैट 2025 का आयोजन पिछले साल दिसंबर में हुआ था, और यह परीक्षा राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों में स्नातक और स्नातकोत्तर विधि पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए निर्धारित की जाती है। परीक्षा में कुछ प्रश्नों में त्रुटियों का आरोप लगाते हुए विभिन्न उच्च न्यायालयों में याचिकाएं दायर की गईं। इसके अलावा, पीजी पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए भी परिणामों को चुनौती दी गई।

निर्णय का उद्देश्य:
मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि सभी याचिकाओं को एक ही उच्च न्यायालय में स्थानांतरित करने से शीघ्र और सुसंगत निर्णय संभव होंगे। न्यायालय ने यह भी कहा कि कर्नाटक, बम्बई, पंजाब और हरियाणा, मध्य प्रदेश, और कलकत्ता जैसे उच्च न्यायालयों के रजिस्ट्रारों को लंबित मामलों के न्यायिक रिकॉर्ड दिल्ली उच्च न्यायालय में भेजने का आदेश दिया गया है।

छात्रों की प्रतिक्रिया:
कई छात्रों ने इस फैसले का स्वागत किया, खासकर क्योंकि दिल्ली उच्च न्यायालय ने पहले क्लैट-यूजी 2025 परीक्षा के दो प्रश्नों में त्रुटियों की पहचान करते हुए कंसोर्टियम को परिणाम संशोधित करने का आदेश दिया था। दिल्ली उच्च न्यायालय के एकल न्यायाधीश ने 20 दिसंबर 2024 को ये आदेश पारित किया था, जिसके बाद छात्रों को एक राहत मिली थी।

आगे की प्रक्रिया:
अब दिल्ली उच्च न्यायालय में 3 मार्च को होने वाली सुनवाई में इस मामले का विस्तृत समाधान लिया जाएगा। सीएनएलयू ने अपनी याचिका अधिवक्ता प्रीथा श्रीकुमार अय्यर के माध्यम से दायर की थी, और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सीएनएलयू का प्रतिनिधित्व किया।

इस निर्णय से क्लैट 2025 के परिणामों पर व्यापक असर पड़ सकता है, और सभी पक्षों की ओर से आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण निर्णयों की उम्मीद है।

Asmita Sarkar

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