
सहकारिता मंत्री अमित शाह ने घोषणा की है कि राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है। इस पहल के तहत सहकारी समितियों की जानकारी एक क्लिक पर उपलब्ध होगी, जिससे पारदर्शिता और सुगमता बढ़ेगी। यह सहकारी क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।
मंगलवार को सहकारिता मंत्रालय की संसदीय सलाहकार समिति की पहली बैठक की अध्यक्षता करते हुए शाह ने बताया कि त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए एक विधेयक जल्द ही संसद में पेश किया जाएगा। इस विश्वविद्यालय का उद्देश्य सहकारी क्षेत्र को कॉर्पोरेट क्षेत्र के समान अवसर प्रदान करना है।
इस विश्वविद्यालय के माध्यम से सहकारी क्षेत्र में प्रवेश करने वाले पेशेवरों को तकनीकी शिक्षा, लेखांकन, प्रशासनिक ज्ञान और प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। शाह ने कहा कि इससे सहकारी क्षेत्र के लिए प्रशिक्षित जनशक्ति की उपलब्धता सुनिश्चित होगी।
शाह ने समिति को बताया कि कृषक भारती सहकारी लिमिटेड (कृभको), भारतीय कृषक उर्वरक सहकारी लिमिटेड (इफको), राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) और अन्य महासंघों के सहयोग से राष्ट्रीय सहकारी महासंघों के विकास के लिए एक विस्तृत रोडमैप तैयार किया गया है।
मंत्री ने बताया कि सहकारिता मंत्रालय भारतीय रिजर्व बैंक और आयकर विभाग के साथ मिलकर “कॉर्पोरेट और सहकारी क्षेत्रों के लिए एक कर ढांचा” तैयार करने की दिशा में काम कर रहा है।
शाह ने कहा कि प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) को व्यवहार्य बनाने के लिए तैयार मॉडल उपनियमों को देश के लगभग सभी राज्यों ने अपनाया है। इससे आने वाले वर्षों में सहकारी क्षेत्र में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिलेंगे।
PACS को 20 से अधिक गतिविधियों से जोड़ा गया है, जिसमें कॉमन सर्विस सेंटर, जन औषधि केंद्र और अन्य सेवाएं शामिल हैं।
शाह ने विश्वास व्यक्त किया कि देश के सहकारी उद्यम कॉर्पोरेट जगत के साथ प्रतिस्पर्धा करते हुए आगे बढ़ेंगे और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के “सहकार से समृद्धि” के विजन को साकार करेंगे।
बैठक में केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री कृष्ण पाल, सहकारिता सचिव मुरलीधर मोहोल, और मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।




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