
दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) और बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) से कानून के छात्रों के लिए ऑनलाइन कक्षाओं के संचालन पर विचार करने का आग्रह किया है। अदालत ने कहा कि इसे उचित सुरक्षा उपायों और शर्तों के साथ एक तंत्र विकसित करना चाहिए।
न्यायमूर्ति दिनेश कुमार शर्मा ने यह स्वीकार किया कि व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में शारीरिक उपस्थिति का एक विशेष महत्व होता है, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता में निरंतर विकास के कारण “प्रभावी दूरस्थ शिक्षा तंत्र” विकसित करने का एक अवसर है। यह टिप्पणी दिल्ली विश्वविद्यालय के कानून छात्रों द्वारा उपस्थिति में कमी के कारण सेमेस्टर परीक्षा में बैठने की अनुमति न मिलने से संबंधित याचिकाओं के एक बैच को खारिज करते हुए दी गई।
अदालत ने इस आधार पर हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया कि रिट क्षेत्राधिकार के तहत कुल उपस्थिति आवश्यकता में कोई छूट नहीं दी जा सकती, लेकिन अधिकारियों को आभासी कक्षाओं के लिए तकनीकी प्रगति को अपनाने के लिए प्रेरित किया। अदालत ने कहा, “दिल्ली विश्वविद्यालय और बार काउंसिल ऑफ इंडिया छात्रों को उचित सुरक्षा उपायों और शर्तों के साथ ऑनलाइन कक्षाओं में भाग लेने में सक्षम बनाने के लिए एक तंत्र विकसित कर सकते हैं।”
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में शारीरिक उपस्थिति का महत्व है, लेकिन प्रौद्योगिकी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विकास से प्रभावी दूरस्थ शिक्षा के अवसर उपलब्ध हो सकते हैं। फैसले में अदालत ने यह उल्लेख किया कि जब छात्रों ने प्रवेश के समय अपने मोबाइल नंबर और ई-मेल आईडी प्रदान की थी, तो उन्हें समय पर उपस्थिति और व्याख्यान की जानकारी दी जानी चाहिए। इसके अलावा, अदालत ने यह भी कहा कि विधि संकाय को छात्रों को एसएमएस, व्हाट्सएप और ई-मेल के माध्यम से मासिक उपस्थिति अपडेट भेजने और उसका रिकॉर्ड रखने की व्यवस्था करनी चाहिए।
अदालत ने यह भी सलाह दी कि विधि संकाय के डीन और बार काउंसिल ऑफ इंडिया छात्रों के लिए कम उपस्थिति से संबंधित मामलों में प्रतिनिधित्व करने के लिए एक तंत्र विकसित कर सकते हैं, और यदि अनुरोध सही पाया जाता है, तो अधिकारी उचित निर्णय ले सकते हैं।
फैसले में अदालत ने कहा कि रिट अधिकार क्षेत्र के तहत उसका कार्य “छात्रों द्वारा अनुशासन की स्पष्ट अवहेलना” के मामलों में राहत प्रदान करने का नहीं है। अदालत ने यह भी कहा कि एलएलबी व्यावसायिक पाठ्यक्रम की अखंडता को बनाए रखना और यह सुनिश्चित करना कि नियमों का पालन करने वाले छात्रों को पूर्वव्यापी छूट से कोई पूर्वाग्रह न हो, आवश्यक है।




Add comment