
दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण ने हवा को बेहद जहरीला बना दिया है। इसी समस्या का समाधान निकालने के लिए गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय (आईपीयू) के बीटेक छात्रों ने एक स्मार्ट एयर प्यूरीफायर विकसित किया है। यह प्यूरीफायर सड़कों पर लगी स्ट्रीट लाइटों या बिजली के खंभों पर लगाया जा सकता है और एक घंटे में 8,000 घन मीटर हवा को शुद्ध करने में सक्षम है।
छात्रों के अनुसार, इस प्यूरीफायर को लगाने के लिए किसी अतिरिक्त ढांचे की आवश्यकता नहीं है। केवल बिजली के खंभों पर इसे लगाकर 50 से 80 मीटर तक के क्षेत्र की हवा को स्वच्छ किया जा सकता है। हाल ही में आयोजित स्मार्ट दिल्ली आइडियाथॉन प्रतियोगिता में इस प्यूरीफायर का प्रोटोटाइप प्रस्तुत किया गया था, जहां यह प्रोजेक्ट शीर्ष 20 में शामिल रहा।
छात्रों की अभिनव सोच
इस स्मार्ट एयर प्यूरीफायर को आईपीयू के बीटेक इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग के तीसरे वर्ष के पांच छात्रों—अर्णव शर्मा, आशीष, ऋषभ मित्तल, आदित्य और तनिष्क नैन की टीम ने विकसित किया है। टीम लीडर अर्णव शर्मा के अनुसार, दिल्ली में प्रदूषण एक गंभीर समस्या बन चुका है। उन्होंने कहा, “हमारे पास संसाधन और तकनीक तो हैं, लेकिन अभी तक प्रदूषण पर नियंत्रण पूरी तरह संभव नहीं हो पाया है। इसलिए हमने ऐसा एयर प्यूरीफायर बनाने का निर्णय लिया, जो सस्ता हो और आसानी से लगाया जा सके।”
स्मार्ट आइडियाथॉन में शीर्ष 20 में स्थान
आईपीयू ने यातायात जाम, कचरा प्रबंधन, वायु प्रदूषण, जल संकट और महिलाओं की सुरक्षा जैसी शहरी समस्याओं के समाधान खोजने के लिए स्मार्ट आइडियाथॉन प्रतियोगिता का आयोजन किया था। इस प्रतियोगिता में देशभर से 1,000 से अधिक प्रविष्टियां प्राप्त हुईं, और इसका समापन विज्ञान भवन में हुआ। इसका उद्देश्य नवाचार और प्रौद्योगिकी के माध्यम से शहरी समस्याओं का समाधान खोजना था। इस प्रतियोगिता में छात्रों की टीम का प्रोजेक्ट शीर्ष 20 में शामिल हुआ। अब छात्र इसे अन्य प्रतियोगिताओं में भी प्रस्तुत करेंगे और स्टार्टअप के रूप में लॉन्च करने की योजना बना रहे हैं।
कम लागत में प्रभावी समाधान
यह एयर प्यूरीफायर बिजली के खंभों पर आसानी से लगाया जा सकता है और इसे स्थापित करने के लिए किसी अलग संरचना की आवश्यकता नहीं है। इस उपकरण की लागत मात्र 6,000 से 8,000 रुपये है। इसमें दो सेंसर, एक फिल्टर और पंखे लगे हैं, जो हवा में मौजूद प्रदूषकों को छानकर उसे शुद्ध करने में मदद करते हैं। टेस्टिंग के दौरान यह पाया गया कि यह वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) में सुधार लाने में प्रभावी है।
छात्रों का यह नवाचार कम लागत में अधिकतम प्रभाव डालने वाला साबित हो सकता है और यदि इसे बड़े पैमाने पर लागू किया जाए तो दिल्ली जैसे प्रदूषित शहरों की हवा को शुद्ध करने में मदद मिल सकती है।




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