
एपीजी शिमला विश्वविद्यालय के एनएसएस स्वयंसेवकों ने शुक्रवार को विश्वविद्यालय परिसर और उसके आस-पास के ग्रामीण क्षेत्र में एक दिवसीय स्वच्छता अभियान आयोजित किया। इस अभियान की शुरुआत विश्वविद्यालय के एन.एस.एस. यूनिट के अधिकारी डॉ. प्यार सिंह और समन्वयक सहायक प्रो. अतुल दुबे की देखरेख में हुई। इस दौरान विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आर. एस. चौहान ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की और स्वयंसेवकों को स्वच्छता अभियान के लिए हरी झंड़ी दिखाकर रवाना किया।
कुलपति प्रो. आर. एस. चौहान ने सभी प्राध्यापकों, विद्यार्थियों, शोधार्थियों, सफाई कर्मचारियों और एन.एस.एस. स्वयंसेवकों को स्वच्छता की शपथ दिलाई और स्वच्छता किट का वितरण किया। उन्होंने इस अवसर पर कहा कि स्वच्छता केवल बाहरी तौर पर नहीं, बल्कि हमारे विचारों में भी होनी चाहिए। स्वच्छता अभियान एक दिन, एक सप्ताह या एक पखवाड़े तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि इसे दैनिक आदत बनाना होगा और हर नागरिक को इसे अपनी दिनचर्या में अपनाना पड़ेगा।
स्वयंसेवकों ने न सिर्फ विश्वविद्यालय परिसर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्र की सफाई की, बल्कि उन्होंने स्थानीय निवासियों से संवाद स्थापित कर उन्हें स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और नैतिक मूल्यों के बारे में जागरूक किया। साथ ही, उन्होंने लोगों से अपने आसपास की सफाई बनाए रखने की अपील की और स्वच्छ भारत, स्वस्थ भारत के संदेश को फैलाया।
स्वच्छता अभियान के दौरान विश्वविद्यालय के कुलाधिपति इंजीनियर सुमन विक्रांत, प्रति-कुलाधिपति प्रो. डॉ. रमेश चौहान, कुलसचिव डॉ. अंकित ठाकुर, संयुक्त कुलसचिव मनीष अग्रवाल, शैक्षणिक अधिष्ठाता प्रो. डॉ. आनंदमोहन शर्मा, परीक्षा नियंत्रक डॉ. अफजल खान और विश्वविद्यालय के अधिकारी रजत प्रताप नागोलता भी उपस्थित थे।
कुलाधिपति इंजीनियर सुमन विक्रांत और प्रति-कुलाधिपति प्रो. डॉ. रमेश चौहान ने स्वयंसेवकों के उत्साह और मेहनत की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे सामाजिक कार्य न केवल समाज में सकारात्मक बदलाव लाते हैं, बल्कि छात्रों में सेवा और नेतृत्व की भावना को भी प्रोत्साहित करते हैं। स्थानीय ग्रामीणों और स्कूल के शिक्षकों ने भी एनएसएस दल की इस पहल की सराहना की और भविष्य में ऐसे जागरूकता अभियानों को जारी रखने की अपील की। एनएसएस स्वयंसेवकों की यह पहल स्वच्छता और सामाजिक सेवा का एक बेहतरीन उदाहरण प्रस्तुत करती है।




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