
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने अपने संबद्धता मानदंडों में बदलाव करते हुए स्कूलों को एक ही नाम और संबद्धता संख्या के तहत शाखा स्कूल खोलने की अनुमति दे दी है। हालांकि, इन शाखा स्कूलों को शैक्षणिक और भौतिक संसाधनों के लिए अलग-अलग बुनियादी ढांचे की व्यवस्था करनी होगी।
CBSE के नए नियमों के तहत, शाखा स्कूलों के छात्रों को मुख्य स्कूल में स्थानांतरित होने की अनुमति होगी, और इसे नया प्रवेश नहीं माना जाएगा।
मुख्य और शाखा विद्यालय की संरचना
मुख्य विद्यालय: कक्षा 6वीं से 12वीं तक संचालित करेगा।
शाखा विद्यालय: नर्सरी से कक्षा 5वीं तक की कक्षाएं चला सकता है।
छात्रों को कक्षा 6 में सीधे पदोन्नत किया जाएगा, बिना नए प्रवेश के।
CBSE के सचिव हिमांशु गुप्ता ने बताया, “दोनों शाखाओं का स्वामित्व और प्रबंधन एक ही होगा, और वे समान प्रशासनिक व शैक्षणिक प्रणाली का पालन करेंगे।”
शिक्षण और गैर-शिक्षण स्टाफ दोनों शाखाओं के लिए अलग-अलग होंगे। शिक्षकों के वेतन का भुगतान मुख्य विद्यालय द्वारा किया जाएगा। प्रवेश प्रक्रिया और खातों का प्रबंधन मुख्य विद्यालय के जिम्मे होगा।
CBSE के नए दिशा-निर्देशों के अनुसार शाखा स्कूलों की अलग वेबसाइट नहीं होगी, बल्कि मुख्य विद्यालय की वेबसाइट पर उनके लिए एक विशेष खंड होगा। छात्रों की सुरक्षा, न्यूनतम बुनियादी ढांचे, और शिक्षक-छात्र अनुपात के नियमों का पालन अलग-अलग शाखाओं द्वारा सुनिश्चित किया जाना अनिवार्य होगा।
पहले क्या था नियम?
अब तक, CBSE किसी भी संस्थान को शाखा स्कूल खोलने की अनुमति नहीं देता था। प्रत्येक स्कूल को अलग संबद्धता संख्या प्राप्त करनी होती थी। नए बदलाव के बाद, मुख्य स्कूल और शाखा स्कूल एक ही संबद्धता संख्या के तहत संचालित किए जा सकेंगे।
CBSE सचिव के अनुसार, बोर्ड सभी प्रशासनिक मुद्दों पर संवाद के लिए मुख्य विद्यालय के प्रधानाचार्य से संपर्क करेगा। हालांकि, ज़रूरत पड़ने पर शाखा विद्यालय से भी संवाद किया जा सकता है।
CBSE के इस नए निर्णय से विद्यालयों के प्रशासनिक कार्यों में आसानी होगी और छोटे बच्चों के लिए आसपास के क्षेत्रों में ही शिक्षा प्राप्त करना संभव होगा। इससे शिक्षा प्रणाली अधिक लचीली और सुगम बन सकेगी।




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