
राष्ट्रीय मूल्यांकन और प्रत्यायन परिषद (NAAC) ने गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरने वाले अपने 20% मूल्यांकनकर्ताओं को हटा दिया है। अधिकारियों के अनुसार, यह कदम मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए उठाया गया है। साथ ही, 1,000 से अधिक नए समीक्षकों की नियुक्ति की गई है, जिन्हें जल्द ही प्रशिक्षित किया जाएगा।
अनियमितताओं के बाद सख्त कार्रवाई
NAAC लंबे समय से अपने मूल्यांकनकर्ताओं के कार्य और आचरण की समीक्षा कर रहा था। हाल के वर्षों में अनियमितताओं की शिकायतें मिलने के बाद सख्त कदम उठाए गए हैं। NAAC के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “हमारे पास विभिन्न क्षेत्रों के 7,000 से अधिक मूल्यांकनकर्ता थे, जो उच्च शिक्षण संस्थानों (HEI) की ग्रेडिंग प्रक्रिया में शामिल थे। हाल की समीक्षा में पाया गया कि कई मूल्यांकनकर्ता अब सक्रिय नहीं थे, जबकि कुछ गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतर रहे थे। इसी कारण हमने इनकी संख्या में 20% की कटौती की है।”
इसके अलावा, कई मूल्यांकनकर्ताओं को 6 महीने से 1 वर्ष तक के लिए निलंबित कर दिया गया है, जबकि कुछ को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है।
नए समीक्षकों की भर्ती और ऑनलाइन प्रणाली
NAAC ने 1,000 से अधिक नए समीक्षकों को शामिल किया है, जिन्हें शीघ्र ही प्रशिक्षित किया जाएगा। मूल्यांकन प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाने के लिए कॉलेजों का भौतिक निरीक्षण बंद कर दिया गया है और अब पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। हालांकि, विश्वविद्यालयों के लिए हाइब्रिड प्रणाली अपनाई जाएगी, जिसमें अधिकांश मूल्यांकन दूरस्थ रूप से होंगे, लेकिन कुछ समीक्षक ऑन-साइट निरीक्षण भी करेंगे।
CBI जांच के बाद कार्रवाई
यह निर्णय गुंटूर स्थित केएलईएफ विश्वविद्यालय को A++ ग्रेड देने के बदले रिश्वत लेने के आरोपों पर CBI द्वारा की गई जांच के बाद लिया गया है। इस घोटाले में शामिल सात सहकर्मी मूल्यांकनकर्ताओं को NAAC ने प्रतिबंधित कर दिया है।
NAAC की नई रणनीति और उद्देश्य
NAAC की स्थापना 1994 में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा उच्च शिक्षण संस्थानों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए की गई थी। इसका उद्देश्य कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को मानकीकृत ग्रेडिंग प्रणाली प्रदान कर शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना है।
नई रणनीति के तहत, मूल्यांकनकर्ताओं की जवाबदेही तय करने और भ्रष्टाचार पर रोक लगाने के लिए कड़े कदम उठाए गए हैं। ऑनलाइन प्रणाली लागू होने से पारदर्शिता बढ़ेगी और कॉलेजों एवं विश्वविद्यालयों को मूल्यांकन प्रक्रिया में अधिक स्पष्टता मिलेगी।




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