
दिल्ली टीचर्स यूनिवर्सिटी (DTU) जल्द ही ‘फैमिली वैल्यूज एंड पैरेंटिंग’ नामक एक डिप्लोमा कोर्स शुरू करने जा रही है, जो अभिभावकों को बच्चों की बेहतर परवरिश के लिए प्रशिक्षित करेगा। संभावना है कि इसी सत्र में दाखिला प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
बेहतर अभिभावक बनने की आवश्यकता
कुलपति प्रो. धनंजय जोशी ने कहा कि दुनिया के कई देशों में अभिभावकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम उपलब्ध हैं, लेकिन भारत में ऐसी कोई औपचारिक व्यवस्था नहीं है। उन्होंने कहा, “अभिभावक बनना आसान है, लेकिन उस भूमिका को सही तरीके से निभाना कठिन है। बच्चों की मानसिक स्थिति को समझने के लिए माता-पिता को मानसिक रूप से तैयार होने की आवश्यकता है। यदि सही परवरिश न मिले तो बच्चे अवसाद में जा सकते हैं।”
मनोविज्ञान के क्षेत्र में पैरेंटिंग एक महत्वपूर्ण डोमेन है। इसी को ध्यान में रखते हुए, विश्वविद्यालय इस विषय पर छह माह का डिप्लोमा कोर्स शुरू कर रहा है, जिसे प्रशिक्षित शिक्षक पढ़ाएंगे। भविष्य में डिप्लोमा के साथ-साथ डिग्री कोर्स लाने पर भी विचार किया जा रहा है।
नई शिक्षा नीति के अनुरूप प्रशिक्षण
प्रो. जोशी ने बताया कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) में विभिन्न विषयों को आपस में जोड़कर पढ़ाने पर जोर दिया गया है। इस दिशा में DTU ऑनलाइन कोर्स विकसित करने पर भी काम कर रही है। इसके अलावा, योग, ध्यान और आत्म-संवर्धन (Self Well-being) जैसे कोर्स भी तैयार किए जा रहे हैं।
कोविड के बाद पैरेंटिंग में आया बदलाव
कोरोना महामारी के बाद बच्चों और अभिभावकों के व्यवहार में बड़ा बदलाव आया है। मानसिक और शारीरिक परेशानियां बढ़ी हैं। प्रो. जोशी ने कहा कि “अभिभावक धीरे-धीरे एक मशीन की तरह धन कमाने में व्यस्त हो गए हैं, जिससे बच्चों के प्रति उनका जुड़ाव कम हो रहा है।”
इस कोर्स का उद्देश्य अभिभावकों को मानसिक, व्यवहारिक और भावनात्मक रूप से बच्चों से जोड़ना और उनके प्रति जागरूकता बढ़ाना है। DTU की यह पहल पैरेंटिंग को एक संरचित और वैज्ञानिक दृष्टिकोण देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।




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