
ठाणे की एक अदालत ने एक शैक्षणिक संस्थान के अध्यक्ष की जमानत याचिका खारिज कर दी है, जिन पर एक महिला से बलात्कार और यौन उत्पीड़न का आरोप है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि रिकॉर्ड में पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं और मामले की जांच अभी प्रारंभिक चरण में है।
ठाणे के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सूर्यकांत एस. शिंदे ने 4 मार्च को यह आदेश जारी किया, जिसकी प्रति शनिवार को उपलब्ध कराई गई।
आरोपी 30 जनवरी को हुआ था गिरफ्तार
आरोपी रमेशचंद्र शोभनाथ मिश्रा को 30 जनवरी 2025 को गिरफ्तार किया गया था। पीड़िता की शिकायत के अनुसार, 2013 में शिक्षण की नौकरी की तलाश में उनकी मुलाकात आरोपी से हुई थी।
आरोपी, जो ठाणे में एक शैक्षणिक संस्थान का अध्यक्ष है, ने नौकरी दिलाने के नाम पर 7 लाख रुपये की मांग की और 70,000 से 80,000 रुपये मासिक वेतन देने का वादा किया। किसी तरह पीड़िता ने 6 लाख रुपये जुटाकर दिए, लेकिन 2015 में आरोपी ने नौकरी पक्की करने के बदले 10 लाख रुपये और मांगे।
जब पीड़िता ने पैसे देने से इनकार कर दिया, तो आरोपी ने कथित तौर पर उसे यौन संबंध बनाने के लिए मजबूर किया और किसी को बताने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी।
नौकरी के बदले पैसे और यौन शोषण का आरोप
पीड़िता ने आरोप लगाया कि आरोपी ने नौकरी दिलाने के बहाने कई बार उसका यौन शोषण किया।
बचाव पक्ष के वकील ने दावा किया कि पीड़िता जूनियर कॉलेज की नौकरी के लिए योग्य नहीं थी, क्योंकि उसके पास स्नातकोत्तर की डिग्री नहीं थी। उन्होंने इस मामले को व्यक्तिगत रंजिश का परिणाम बताया।
जमानत के लिए आरोपी की स्वास्थ्य स्थिति का हवाला देते हुए कहा गया कि वह मधुमेह का मरीज है और इलाज चल रहा है।
हालांकि, अतिरिक्त लोक अभियोजक संजय मोरे ने बताया कि आरोपी के खिलाफ कई महिलाओं ने इसी तरह के आरोप लगाए हैं, जिससे यह मामला और गंभीर हो जाता है।
कोर्ट ने कहा – गंभीर मामला, जमानत नहीं दी जा सकती
न्यायाधीश शिंदे ने अपने आदेश में कहा, “शिकायत में लगाए गए आरोपों पर विचार करने के बाद, इस स्तर पर रिकॉर्ड पर पर्याप्त सामग्री मौजूद है। मामले की जांच अभी प्रारंभिक चरण में है।”
अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह मामला भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं के तहत बनता है, जिसमें 64(2)(M): एक ही महिला से बार-बार बलात्कार, 68: अधिकार में बैठे व्यक्ति द्वारा संभोग, 69: धोखेबाज तरीकों आदि से संभोग, 75: यौन उत्पीड़न, 79: महिला की शील का अपमान करने के इरादे से शब्द, इशारा या कृत्य, 351(2): आपराधिक साजिश और 352: जानबूझकर अपमान और शांति भंग करने का इरादा शामिल है।
न्यायाधीश ने कहा, “अपराध की गंभीरता और मामले की जांच जारी रहने को देखते हुए, आरोपी को जमानत देना इस समय उचित नहीं होगा।”




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