
अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने शनिवार को अरुणाचल प्रदेश स्टूडेंट्स यूनियन (AAPSU) के नेताओं से अपील की कि वे अपनी चुनावी प्रक्रिया को भ्रष्टाचार मुक्त करें। यह बयान उन्होंने राज्य के सर्वोच्च छात्र संगठन AAPSU द्वारा आयोजित अंतर-जनजातीय महोत्सव के उद्घाटन सत्र में दिया। मुख्यमंत्री खांडू ने कहा कि भ्रष्टाचार किसी भी संगठन के सुचारू संचालन में बड़ी बाधा है।
मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की भ्रष्टाचार के खिलाफ उठाए गए कदमों के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने स्पेशल इन्वेस्टिगेशन सेल (SIC) को अपग्रेड कर एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) बनाया है, ताकि भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सके। इसके अलावा, राज्य सरकार ने स्टेट सेलेक्शन बोर्ड और पब्लिक सर्विस कमीशन में भी सुधार किए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा, “भ्रष्टाचार केवल सरकारी दफ्तरों और कर्मचारियों तक सीमित नहीं है।” उन्होंने AAPSU से आग्रह किया कि वह अपनी चुनावी प्रक्रिया में पैसों के लेन-देन को रोकने के लिए सुधार लाए। खांडू ने यह भी बताया कि छात्र संघों के चुनावों में भारी पैमाने पर पैसों का लेन-देन होता है, और AAPSU से इस भ्रष्टाचार को रोकने की पहल करने की अपील की।
इसके साथ ही, खांडू ने छात्रों को राजनीति के अलावा अन्य करियर विकल्पों पर भी ध्यान देने की सलाह दी। उन्होंने कहा, “हां, कई AAPSU नेता राजनीति में आकर मंत्री और विधायक बने हैं। लेकिन क्या किसी छात्र नेता ने केंद्र या राज्य स्तर की सिविल सेवा परीक्षाएं पास की हैं?” उन्होंने छात्रों से अपनी पढ़ाई पर ध्यान देने और UPSC तथा APPSC जैसी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त करने का आग्रह किया, जिससे अन्य छात्रों को भी प्रेरणा मिल सके।
मुख्यमंत्री ने AAPSU की स्थापना के बारे में भी बात की, जो 1972 में चकमा-हाजोंग शरणार्थी मुद्दे को हल करने के उद्देश्य से हुई थी। खांडू ने सवाल उठाया, “AAPSU पिछले 53 वर्षों से इस मुद्दे पर संघर्ष कर रहा है, लेकिन क्या यह मुद्दा अब तक हल हुआ?” उन्होंने भरोसा दिलाया कि वर्तमान राज्य और केंद्र सरकार इस मुद्दे को स्थायी रूप से हल करने की दिशा में काम कर रही है और इस संदर्भ में गृह मंत्रालय के साथ लगातार संपर्क में है।
आखिरकार, मुख्यमंत्री ने अरुणाचल प्रदेश फ्रीडम ऑफ रिलिजन एक्ट (APFRA), 1978 के बारे में भी बयान दिया। उन्होंने कहा कि यह कानून किसी भी धर्म के पक्ष या विपक्ष में नहीं है और यह व्यक्तिगत धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा करता है। खांडू ने स्पष्ट किया कि APFRA के नियम उच्च न्यायालय के आदेश के तहत बनाए जाएंगे और इस प्रक्रिया में राज्य के सभी धार्मिक समुदायों से विचार-विमर्श किया जाएगा।




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