
जादवपुर विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (JUTA) ने विश्वविद्यालय का ‘इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस’ (IoE) टैग खोने की खबर पर गहरी चिंता व्यक्त की है। शनिवार को JUTA ने कार्यवाहक कुलपति भास्कर गुप्ता को पत्र लिखकर इस मुद्दे को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के समक्ष रखने की अपील की।
IoE सूची से हटाने का कारण
एक रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने संसद में बताया कि केंद्र की सशक्त विशेषज्ञ समिति (EEC) ने जादवपुर विश्वविद्यालय के संशोधित प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। इसका मुख्य कारण था विश्वविद्यालय के अनुमानित बजट में भारी कटौती—जो पहले 3,299 करोड़ रुपये था, लेकिन बाद में इसे घटाकर 606 करोड़ रुपये कर दिया गया। इसी आधार पर EEC ने UGC को जादवपुर विश्वविद्यालय को IoE सूची से हटाने का निर्देश दिया।
JUTA की आपत्ति और कुलपति से अपील
JUTA ने कुलपति को लिखे पत्र में कहा, “कुछ रिपोर्टों के अनुसार, यह फैसला पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा आवश्यक राशि प्रदान न कर पाने के कारण लिया गया, जबकि कुछ अन्य का दावा है कि विश्वविद्यालय को 2023 में ही सूची से बाहर कर दिया गया था।”
शिक्षक संघ ने आगे कहा कि विश्वविद्यालय को आवेदन शुल्क के रूप में 1 करोड़ रुपये UGC को देने पड़े थे, जो पूर्व छात्रों, शिक्षकों और शुभचिंतकों की मदद से जुटाए गए थे। नियमों के अनुसार, IoE सूची से हटाए जाने पर UGC को आवेदन शुल्क का 75 प्रतिशत (75 लाख रुपये) वापस करना होता है, लेकिन यह राशि अभी तक विश्वविद्यालय को नहीं मिली है।
JUTA के सचिव पार्थ प्रतिम रॉय ने बताया, “हम कुलपति से अनुरोध करते हैं कि वह इस मामले को गंभीरता से लें और उचित कार्रवाई करें।”
राजनीतिक विवाद और राज्य सरकार पर आरोप
इस मुद्दे पर बीजेपी के राज्यसभा सांसद समिक भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि जब केंद्र सरकार 1,000 करोड़ रुपये तक देने को तैयार थी, तब राज्य सरकार ने अपनी हिस्सेदारी देने से इनकार कर दिया और विश्वविद्यालय के बजट को घटाकर 606 करोड़ रुपये कर दिया।
उन्होंने कहा, “इस स्थिति में विश्वविद्यालय को शेष 25 प्रतिशत धनराशि खुद जुटानी पड़ती, जो व्यावहारिक रूप से असंभव था।”
छात्रों का विरोध प्रदर्शन जारी
IoE टैग खोने के मुद्दे पर जादवपुर विश्वविद्यालय में छात्रों का विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। हाल ही में राज्य के शिक्षा मंत्री ब्रत्या बसु के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने उनका वाहन रोक लिया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि मंत्री की कार ने दो छात्रों को घायल कर दिया, जिससे स्थिति और तनावपूर्ण हो गई।
इस घटना के बाद छात्रों ने उग्र प्रदर्शन किया, जिसमें तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं भी हुईं। प्रदर्शनकारी जल्द से जल्द छात्र संघ चुनाव कराने की मांग कर रहे हैं।
आगे की राह
JUTA ने इस मुद्दे पर UGC से हस्तक्षेप की मांग की है और कुलपति से अपील की है कि विश्वविद्यालय के हितों की रक्षा के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएं। वहीं, छात्रों का विरोध प्रदर्शन और सरकार के खिलाफ नाराजगी बढ़ती जा रही है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विश्वविद्यालय प्रशासन और सरकार इस स्थिति से कैसे निपटते हैं।




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