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स्कूल बसों की सुरक्षा पर जताई चिंता, राज्यसभा में फौजिया खान ने की राष्ट्रीय स्कूल परिवहन नीति लागू करने की मांग

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) की राज्यसभा सदस्य फौजिया खान ने सोमवार को स्कूल बसों और वैनों से जुड़े बढ़ते सड़क हादसों पर चिंता जताई और सरकार से देशभर में एक समान स्कूल परिवहन नीति लागू करने की मांग की। राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए उन्होंने एक अध्ययन का हवाला दिया, जिसमें स्कूल बच्चों को ले जाने वाले वाहनों में सुरक्षा उपायों की कमी का खुलासा हुआ है।

स्कूल वाहनों में सुरक्षा मानकों की कमी
फौजिया खान ने बताया कि भारतीय कानून स्कूल बसों में सीट बेल्ट की अनिवार्यता नहीं करता। जबकि कुछ राज्यों में स्कूल बसों में CCTV कैमरे लगाने की व्यवस्था की गई है, लेकिन यह व्यवस्था सभी राज्यों में लागू नहीं है।

उन्होंने कहा, “भारत में सड़क दुर्घटनाओं में मौतों की दर दुनिया में सबसे ज्यादा है, लेकिन फिर भी हमारे पास स्कूल परिवहन सुरक्षा पर एक राष्ट्रीय नीति नहीं है।”

उन्होंने आगे कहा कि कुछ राज्यों ने स्कूल वाहनों, जैसे बसों और वैनों के लिए मानक नीति बनाई है, लेकिन यह ज्यादातर कागजों तक ही सीमित रहती है और इसका प्रभावी पालन नहीं किया जाता।

बच्चों को ले जाने वाले ऑटो और ई-रिक्शा में सुरक्षा नियमों की कमी
फौजिया खान ने यह भी उल्लेख किया कि स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले ऑटो-रिक्शा और ई-रिक्शा में सुरक्षा उपायों और नियमों की भारी कमी है।

राष्ट्रीय स्कूल परिवहन नीति की जरूरत
उन्होंने कहा, “इन समस्याओं को हल करने के लिए, मैं सरकार से अपील करती हूं कि एक राष्ट्रीय स्कूल परिवहन नीति तैयार की जाए, जो सभी राज्यों में समान सुरक्षा नियमों को लागू करे।”

इस नीति में निम्नलिखित सुरक्षा उपायों को अनिवार्य करने की मांग की गई:
– सीट बेल्ट सभी स्कूल वाहनों में अनिवार्य हो।
– CCTV कैमरे और GPS ट्रैकिंग सिस्टम बसों और वैनों में लगाए जाएं।
– सुरक्षा मानकों को निजी स्कूलों और अन्य परिवहन विकल्पों (ऑटो, वैन, रिक्शा) पर भी लागू किया जाए।
– स्कूल बसों में स्पीड लिमिट और ओवरलोडिंग पर सख्ती से रोक लगाई जाए।

सुरक्षा ऑडिट और ड्राइवर ट्रेनिंग की मांग
फौजिया खान ने यह भी सुझाव दिया कि सभी स्कूल वाहनों की सुरक्षा उपकरणों की नियमित जांच और सुरक्षा ऑडिट किया जाना चाहिए, और इसे एक मानक प्रक्रिया के रूप में लागू किया जाए।

शिकायत निवारण तंत्र और ड्राइवर ट्रेनिंग की आवश्यकता
उन्होंने स्कूलों से अपील की कि वे एक प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र (Grievance Redressal System) स्थापित करें और यह सुनिश्चित करें कि स्कूल वाहन चालकों को नियमित रूप से प्रशिक्षण और संवेदनशीलता बढ़ाने की प्रक्रिया में भाग लेने के लिए प्रेरित किया जाए।

फौजिया खान की यह मांग स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण कदम है। यदि सरकार राष्ट्रीय स्कूल परिवहन नीति लागू करती है, तो यह सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने और बच्चों के सुरक्षित परिवहन को सुनिश्चित करने में मदद कर सकती है।

 

Asmita Sarkar

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