
उच्चतम न्यायालय ने तेलंगाना सरकार से हैदराबाद विश्वविद्यालय के पास स्थित भूखंड पर लगे बड़े वृक्षों को हटाने की “मजबूरी” पर स्पष्टीकरण मांगा है और अगले आदेश तक इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार की गतिविधि पर रोक लगा दी है। राज्य में पेड़ों की कटाई को “बहुत गंभीर मामला” बताते हुए, न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कहा कि तेलंगाना उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार द्वारा पेश की गई अंतरिम रिपोर्ट “चिंताजनक तस्वीर” पेश करती है, जिसमें बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई की सूचना दी गई है।
पीठ ने आदेश दिया, “अगले आदेश तक, पहले से मौजूद पेड़ों के संरक्षण के अलावा, राज्य द्वारा किसी भी प्रकार की कोई गतिविधि नहीं की जाएगी।” इसके साथ ही, तेलंगाना के मुख्य सचिव से पूछा गया कि पेड़ों को हटाने और अन्य विकासात्मक गतिविधियों को शुरू करने की इतनी “मजबूरी” क्यों है। मुख्य सचिव को यह भी बताने का निर्देश दिया गया कि क्या राज्य ने पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन प्रमाणपत्र प्राप्त किया है।
अगर राज्य की ओर से कोई चूक पाई जाती है, तो अदालत ने चेतावनी दी कि वह मुख्य सचिव के खिलाफ कार्रवाई करेगी। पीठ ने कहा, “उन्हें (मुख्य सचिव) झील के पास उसी स्थान पर बनाई गई अस्थायी जेल में भेजा जाएगा।” इसके अलावा, अदालत ने पूछा कि क्या पेड़ों को काटने के लिए वन प्राधिकरण या अन्य स्थानीय प्राधिकरण से अनुमति ली गई थी।
अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि एक केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति संबंधित स्थान का दौरा कर 16 अप्रैल से पहले अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करे। इस मामले की अगली सुनवाई 16 अप्रैल को होगी।




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