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भारत में अब तक नहीं खुला किसी भी टॉप ग्लोबल यूनिवर्सिटी का कैंपस, संसदीय समिति ने जताई चिंता

भारत अब तक किसी भी शीर्ष वैश्विक विश्वविद्यालय, विशेष रूप से आइवी लीग संस्थानों, से अपना परिसर प्राप्त करने में सफल नहीं हो पाया है। इस पर चिंता व्यक्त करते हुए एक संसदीय समिति ने कहा है कि भारत को इस दिशा में अधिक सक्रिय और रणनीतिक प्रयास करने की आवश्यकता है।

इस समिति की अध्यक्षता कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह कर रहे हैं। समिति ने हाल ही में राज्यसभा में पेश की गई अपनी रिपोर्ट में यह मुद्दा उठाया है।

विदेशी विश्वविद्यालयों की भारत में बढ़ती रुचि, लेकिन अग्रणी संस्थान अब भी दूर
रिपोर्ट के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में भारत में विदेशी विश्वविद्यालयों द्वारा परिसर खोलने में रुचि जरूर बढ़ी है। इसका कारण भारत की विशाल छात्र आबादी और सरकार द्वारा संयुक्त डिग्री कार्यक्रमों व शैक्षणिक सहयोग को बढ़ावा देना है।

हालांकि, रिपोर्ट में कहा गया है कि अब तक भारत को हार्वर्ड, येल, प्रिंसटन, कोलंबिया जैसे प्रतिष्ठित आइवी लीग विश्वविद्यालयों, या न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय, कार्नेगी मेलन जैसे अग्रणी संस्थानों से कोई कैंपस प्राप्त नहीं हुआ है।

समिति ने सुझाव दिया है कि उच्च शिक्षा विभाग को छात्रों को वैश्विक स्तर की शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए इन संस्थानों से कैंपस स्थापित करवाने के प्रयास तेज करने चाहिए।

कुछ विश्वविद्यालयों ने की पहल, अमेरिकी संस्थान अब भी पीछे
भारत में UGC ने 2023 में विदेशी विश्वविद्यालयों के परिसरों की स्थापना के लिए दिशा-निर्देश जारी किए थे। इसके बाद ऑस्ट्रेलिया के डीकिन और वोलोंगोंग विश्वविद्यालय ने गुजरात के गिफ्ट सिटी में अपने परिसरों की स्थापना की है। वहीं, ब्रिटेन के साउथेम्प्टन, क्वीन्स यूनिवर्सिटी बेलफास्ट और कोवेंट्री यूनिवर्सिटी को भी अनुमति दी जा चुकी है।

लेकिन अब तक किसी भी अमेरिकी विश्वविद्यालय ने भारत में कैंपस स्थापित नहीं किया है।

स्टडी इन इंडिया योजना और अंतरराष्ट्रीयकरण की पहल
स्टडी इन इंडिया (SII) कार्यक्रम 2018 में शुरू किया गया था, जिसका उद्देश्य विदेशी छात्रों को आकर्षित करके भारतीय उच्च शिक्षा को वैश्विक स्तर पर लोकप्रिय बनाना है।

UGC ने विदेशी छात्रों के लिए 25% अतिरिक्त सीटें आरक्षित करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही, संस्थानों में अंतरराष्ट्रीय कार्यालय और पूर्व छात्र संपर्क केंद्र स्थापित करने की भी योजना है।

संयुक्त अनुसंधान को बढ़ावा देने की योजना
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारतीय और विदेशी शिक्षण संस्थानों के बीच रिसर्च साझेदारी को बढ़ावा देने के लिए सरकार एक योजना पर कार्य कर रही है। इसके तहत प्रोफेसर भारत और विदेश के संस्थानों से मिलकर संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं पर काम कर रहे हैं।

अब तक 28 देशों, जिनमें अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं, इस योजना में भाग ले रहे हैं। इसके अंतर्गत 787 संयुक्त शोध प्रस्तावों को मंजूरी दी जा चुकी है।

इन परियोजनाओं में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य और औद्योगिक नवाचार जैसे रणनीतिक क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है।

यह रिपोर्ट भारत में वैश्विक शिक्षा के क्षेत्र को खोलने की दिशा में उठाए गए कदमों की समीक्षा तो करती है, लेकिन यह भी स्पष्ट करती है कि अग्रणी वैश्विक विश्वविद्यालयों को आकर्षित करने के लिए और अधिक ठोस रणनीतियों और प्रयासों की आवश्यकता है।

Asmita Sarkar

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