
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) के कामकाज से संबंधित उस मामले को बंद कर दिया जो पिछले साल आयोजित NEET-UG परीक्षा में गड़बड़ियों को लेकर दायर किया गया था। कोर्ट ने यह फैसला केंद्र सरकार द्वारा परीक्षा सुधारों को लागू करने का आश्वासन देने के बाद लिया।
न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने केंद्र द्वारा पेश की गई अनुपालन रिपोर्ट और महाधिवक्ता तुषार मेहता की दलीलों पर ध्यान दिया और मामले का निपटारा कर दिया।
एक सुझाव को छोड़ बाकी सभी सिफारिशें स्वीकार
महाधिवक्ता मेहता ने बताया कि केंद्र सरकार ने सात सदस्यीय विशेषज्ञ पैनल की सभी सिफारिशों को स्वीकार कर लिया है, सिवाय एक के — NEET परीक्षा को ऑनलाइन कराने के सुझाव के।
उन्होंने कहा, “देशभर में 26 लाख से अधिक छात्र NEET में शामिल होते हैं। ऐसे में कंप्यूटर और इंटरनेट की उपलब्धता सुनिश्चित करना समय लेगा, इसलिए इस सुझाव को फिलहाल टाल दिया गया है।”
मेहता ने आगे कहा कि अब इस मामले में कुछ भी शेष नहीं बचा है, अतः इसका निपटारा किया जा सकता है। पीठ ने घटनाक्रमों को संज्ञान में लेते हुए कहा कि अब किसी अतिरिक्त आदेश की आवश्यकता नहीं है।
पिछले साल रद्द करने से किया था इनकार
गौरतलब है कि 2 अगस्त 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने NEET-UG परीक्षा रद्द करने से इनकार कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं है जो यह दिखाता हो कि परीक्षा की अखंडता को व्यवस्थित लीक या कदाचार ने प्रभावित किया हो।
ISRO प्रमुख की अध्यक्षता में बना था विशेषज्ञ पैनल
पूर्व ISRO प्रमुख के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में गठित सात सदस्यीय विशेषज्ञ पैनल को NTA के कामकाज की समीक्षा करने और NEET-UG (राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा स्नातक) को पारदर्शी और कदाचार से मुक्त बनाने के लिए परीक्षा सुधारों की सिफारिश करने के कार्यक्षेत्र का विस्तार किया गया था।




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