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बंगाल बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की याचिका, 25 हजार से अधिक नौकरियों को रद्द करने के आदेश में संशोधन की मांग

पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (WBBSE) ने सोमवार, 7 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की, जिसमें हाल ही में रद्द की गई 25,000 से अधिक स्कूल नौकरियों को लेकर ‘संशोधन’ की मांग की गई है। यह याचिका तब दाखिल की गई जब सुप्रीम कोर्ट ने 2016 की स्कूल भर्ती प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं को आधार बनाते हुए पूरी चयन सूची को निरस्त कर दिया।

बोर्ड के एक उच्च स्तरीय सूत्र के अनुसार, बोर्ड के वकील ने शीर्ष अदालत से अपील की है कि योग्य और ईमानदारी से चयनित उम्मीदवारों को या तो आगामी शैक्षणिक सत्र की समाप्ति तक या फिर नई भर्ती प्रक्रिया शुरू होने तक कार्य पर बने रहने की अनुमति दी जाए। हालांकि, बोर्ड के अध्यक्ष रामानुज गांगुली ने इस विषय पर कोई टिप्पणी नहीं की।

क्या है मामला?
3 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में 2016 में हुई शिक्षक और गैर-शिक्षकीय कर्मचारियों की भर्ती को रद्द कर दिया। इस निर्णय से 25,753 कर्मचारी प्रभावित हुए, जिनमें अधिकांश सेकेंडरी स्कूलों में कार्यरत थे। अदालत ने भर्ती प्रक्रिया को “विषाक्त और दूषित” करार देते हुए इसे पूरी तरह खारिज कर दिया। साथ ही, कोलकाता हाईकोर्ट के 22 अप्रैल 2024 के निर्णय को भी बरकरार रखा गया, जिसमें नियुक्तियां निरस्त की गई थीं।

रद्द किए गए कर्मचारियों का कहना है कि स्कूल सेवा आयोग (SSC) ने यह स्पष्ट नहीं किया कि किन उम्मीदवारों की नियुक्ति धोखाधड़ी से हुई और किनकी ईमानदारी से। आयोग के अध्यक्ष सिद्धार्थ मजूमदार ने पीटीआई से कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश में कुछ बिंदुओं को स्पष्ट करने के लिए आयोग जल्द ही एक याचिका दायर करेगा।

राज्य के शिक्षा मंत्री ब्रत्य बासु ने पूर्व में कहा था कि सुप्रीम कोर्ट SSC द्वारा दी गई जानकारी से संतुष्ट नहीं था, और अब इस पूरे मामले में सुप्रीम कोर्ट से ही आगे का मार्गदर्शन लिया जाएगा।

 

Asmita Sarkar

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