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जम्मू-कश्मीर में अब स्कूल-कॉलेज बच्चों को नहीं करा सकेंगे पिकनिक, सरकार ने लगा दिया बैन

अक्सर आपने देखा होगा कि स्कूल और कॉलेज वीकेंड या छुट्टियों के दौरान अपने छात्रों को पिकनिक या शैक्षणिक टूर पर लेकर जाते हैं। ये टूर छात्रों के लिए मस्ती और सीखने का एक ज़रिया होते हैं, और बच्चे इन्हें दोस्तों के साथ मिलकर खूब एंजॉय करते हैं। लेकिन अब जम्मू-कश्मीर की उमर अब्दुल्ला सरकार ने इन पिकनिक पर पूरी तरह से रोक लगा दी है।

क्यों लगाया गया पिकनिक पर प्रतिबंध?
शिक्षा मंत्री सकीना इटू ने छात्रों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए यह सख्त कदम उठाया है। उन्होंने राज्य के सभी स्कूलों और कॉलेजों द्वारा पिकनिक आयोजन के मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOPs) की समीक्षा की और उसके बाद शनिवार, रविवार और अन्य छुट्टियों के दिनों में पिकनिक पर पूर्ण प्रतिबंध लागू कर दिया।

इस निर्णय के पीछे की सबसे बड़ी वजह हाल ही में कुपवाड़ा जिले में हुआ दर्दनाक हादसा है, जिसमें पिकनिक पर जा रही एक कॉलेज बस के पलटने से दो छात्रों की मौत हो गई और 21 अन्य घायल हो गए।

सुरक्षा के लिए समीक्षा बैठक
छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए शिक्षा मंत्री ने एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाई जिसमें मौजूदा ट्रैफिक नियमों और स्कूल-कॉलेज परिवहन व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई। इस बैठक में मंत्री ने दुर्घटनाओं को लेकर नाराजगी जताई और पुलिस व ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट को निर्देश दिए कि वे छात्रों से जुड़ी बसों पर विशेष ध्यान दें। उन्होंने ओवरस्पीडिंग और नशे में गाड़ी चलाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के लिए विशेष अभियान चलाने को भी कहा।

बसों की जांच और सुरक्षा उपाय होंगे सख्त
शिक्षा मंत्री ने ट्रैफिक नियमों के कई पहलुओं पर भी बात की जैसे कॉलेज और स्कूल बसों के ड्राइविंग लाइसेंस, फिटनेस सर्टिफिकेट और डाक्यूमेंट की वैलिडिटी और उनमें सीसीटीवी कैमरे और अग्नि सुरक्षा उपकरण लगाना। मंत्री ने स्कूली बच्चों को ले जाने वाली सभी सरकारी और प्राइवेट बसों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के सख्त निर्देश दिए। साथ ही मंत्री ने फिटनेस और अन्य पहलुओं के बारे में सभी कॉलेज और स्कूल बसों की नियमित जांच पर जोर दिया। उन्होंने कॉलेजों के डायरेक्टर को सभी कॉलेज बस चालकों का नए सिरे से ड्राइविंग टेस्ट लेने के लिए भी कहा। इसके साथ ही, अतिरिक्त मुख्य सचिव (शिक्षा) को कुपवाड़ा हादसे की गहन विभागीय जांच के निर्देश भी दिए गए हैं।

सरकार का यह फैसला छात्रों की जान की हिफाज़त के लिहाज़ से महत्वपूर्ण है, लेकिन यह भी ज़रूरी है कि भविष्य में इस तरह की पिकनिक योजनाएं सुरक्षित प्रबंधन और कड़े नियमों के साथ दोबारा शुरू हो सकें। फिलहाल, छात्रों की सुरक्षा सर्वोपरि है — और यही इस निर्णय की मूल भावना है।

Asmita Sarkar

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