Edinbox Hindi

भगवद गीता और नाट्यशास्त्र को मिली वैश्विक मान्यता, यूनेस्को के मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड रजिस्टर में शामिल 

17 अप्रैल को यूनेस्को ने भगवद गीता और भरत मुनि के नाट्यशास्त्र को मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड रजिस्टर में शामिल कर एक ऐतिहासिक निर्णय लिया। इस सम्मान को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय संस्कृति व पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने हर्ष व्यक्त किया।

पीएम मोदी ने इसे बताया गर्व का क्षण
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस उपलब्धि को साझा करते हुए लिखा, “दुनिया भर में फैले हर भारतीय के लिए यह गर्व का क्षण है। यूनेस्को के मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड रजिस्टर में गीता और नाट्यशास्त्र को शामिल किया जाना हमारी शाश्वत बुद्धिमत्ता और समृद्ध संस्कृति की वैश्विक मान्यता है। गीता और नाट्यशास्त्र ने सदियों से सभ्यता और चेतना का पोषण किया है। इनकी अंतर्दृष्टि दुनिया को प्रेरित करती रही है।”

पीएम मोदी ने केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के पोस्ट को भी साझा किया और इस ऐतिहासिक निर्णय की सराहना की।

गजेंद्र सिंह शेखावत ने बताया ऐतिहासिक उपलब्धि
केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने लिखा, “यह भारत की सभ्यतागत विरासत के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है। श्रीमद्भगवद्गीता और भरत मुनि के नाट्यशास्त्र को यूनेस्को के मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड रजिस्टर में शामिल किया गया है। यह वैश्विक सम्मान भारत के शाश्वत ज्ञान और कलात्मक प्रतिभा का उत्सव है।”

उन्होंने आगे कहा कि ये कालातीत रचनाएं केवल साहित्यिक खजाना नहीं हैं, बल्कि वे भारत के दर्शन, सौंदर्यबोध और सांस्कृतिक चेतना के आधार हैं। उन्होंने यह भी बताया कि अब भारत के कुल 14 अभिलेख इस अंतरराष्ट्रीय रजिस्टर का हिस्सा बन चुके हैं।

यूनेस्को रजिस्टर में कुल 74 नए दस्तावेज शामिल
यूनेस्को ने 17 अप्रैल को 74 नए दस्तावेजी विरासत संग्रहों को मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड रजिस्टर में शामिल किया, जिससे कुल प्रविष्टियों की संख्या 570 हो गई। इस सूची में 72 देशों और चार अंतरराष्ट्रीय संगठनों से दस्तावेज जुड़े हैं, जिनमें वैज्ञानिक क्रांति, महिलाओं का ऐतिहासिक योगदान और बहुपक्षीय उपलब्धियां शामिल हैं।

क्या है यूनेस्को का मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड रजिस्टर?
यूनेस्को का मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड रजिस्टर विश्व की सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेजी धरोहरों की एक सूची है। इसमें किसी विरासत को अंतरराष्ट्रीय सलाहकार समिति की सिफारिश और कार्यकारी बोर्ड की स्वीकृति के बाद शामिल किया जाता है। इस रजिस्टर में शामिल होना किसी दस्तावेज की वैश्विक मान्यता और अमूल्य सांस्कृतिक मूल्य का प्रतीक माना जाता है। यह न केवल शोध और शिक्षा को बढ़ावा देता है, बल्कि मनोरंजन और संरक्षण के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है।

Asmita Sarkar

Add comment

Recent posts

Most popular

Most discussed